Dharm Desk – श्राद्ध पक्ष में बनाया जाने वाला भोजन बहुत पवित्र शुद्ध और नियमों के अनुकूल होना चाहिए। किचन में छोटी से छोटी असावधानी भी पितरों को दुखी कर सकती है। इसमें एक बात बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है कि श्राद्ध के भोजन में तड़के या छौंक के लिए राई (सरसों के दाने) का उपयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

राई का छौंक लगाने से क्यों नाराज माने जाते हैं पितर
श्राद्ध पक्ष के दौरान पितरों के लिए तैयार की जाने वाली सब्जी या अन्य खाद्य पदार्थों में राई से तड़का लगाने की पूरी तरह मनाई है। ऐसा कहते है कि यदि भोजन में राई का छौंक लगा दिया जाए और वह भोजन, पूरी या प्रसाद कौओं के लिए छत या खुली जगह पर रखा जाए तो कौए उस भोजन को ग्रहण नहीं करते हैं।लोक मान्यताओं में कौवे को पितरों का प्रतिनिधि और संदेशवाहक मानते है। यदि कौवा श्राद्ध का भोजन ग्रहण नहीं करता है। तो यह माना जाता है कि पितर उस भोजन को स्वीकार नहीं कर रहे हैं और वे तृप्त हुए बिना ही लौट जाते हैं। इसलिए पितृपक्ष में किचन में भोजन बनाते समय मसालों और छौंक के चुनाव पर खास ध्यान देना बहुत जरूरी होता है। श्राद्ध पक्ष में पितरों को खुश करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सिर्फ़ शुद्धता ही नहीं बल्कि सही सामग्रियों का चुनाव भी जरुरी होता है।
- भोजन पूरी तरह से सात्विक होना चाहिए। इसमें प्याज, लहसुन, तामसिक मसालों और राई का प्रयोग करने से बचना चाहिए।
- जीरे देसी घी और हींग का प्रयोग छौंक के लिए अच्छा माना जाता है।
- श्राद्ध का भोजन बनाते समय सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए।
- स्नान करने के बाद ही साफ कपड़े पहनकर पूरी श्रद्धा और भाव से रसोई में प्रवेश करें।
- भोजन तैयार होने के बाद सबसे पहले कौवे, गौमाता और कुत्ते के लिए भोजन का भाग निकालना चाहिए, उसके बाद ही ब्राह्मणों को भोजन करवाना चहिए।


