Dharm Desk :- कल यानी 26 सितंबर से श्राद्ध पक्ष की शुरुआत हो रही है। इस दौरान लोग अपने पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और अन्य धार्मिक कर्म करते हैं। श्राद्ध कर्म में कई छोटी-छोटी बातों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। इन्हीं में से एक है पितरों को तिलक लगाने की विधि और इसके लिए सही उंगली का इस्तेमाल।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अलग-अलग

धार्मिक कार्यों में तिलक लगाने के लिए हाथ की अलग-अलग उंगलियों का उपयोग बतया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब पितरों को तिलक करने की बारी आती है, तो किस उंगली का इस्तेमाल करना चाहिए?

पितरों को किस उंगली से लगाया जाता है तिलक

पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध या पितरों के निमित्त किए जाने वाले कर्म में पितरों को तिलक लगाने के लिए हिन्दू शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्वजों को पिंडदान या श्राद्ध आदि कर्मों के दौरान तर्जनी उंगली से तिलक या गंध लगानी चाहिए। पितृपक्ष में तर्पण और श्राद्ध के साथ पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने की परंपरा है। इसलिए धार्मिक कर्म करते समय विधि और परंपरा से जुड़े नियमों का ध्यान रखा जाता है।

खुद को तिलक लगाते समय मध्यमा उंगली

धार्मिक मान्यताओं में स्वयं को तिलक लगाने के लिए मध्यमा यानी बीच की उंगली के इस्तेमाल का उल्लेख मिलता है। हालांकि अलग-अलग संप्रदाय और पूजा पद्धतियों में तिलक लगाने की विधि अलग हो सकती है।

भगवान को तिलक लगाने में अनामिका का प्रयोग

देवी-देवताओं को तिलक अर्पित करते समय अनामिका यानी रिंग फिंगर का इस्तेमाल करने की परंपरा बताई गई है। पूजा के दौरान भगवान को चंदन, रोली या कुमकुम का तिलक लगाते समय इस उंगली का प्रयोग किया जाता है।

अतिथि को तिलक लगाने में अंगूठे का इस्तेमाल

घर आए अतिथि के स्वागत के दौरान तिलक करने की परंपरा में अंगूठे का इस्तेमाल बताया गया है। शुभ अवसरों और धार्मिक कार्यक्रमों में अतिथि के माथे पर तिलक लगाकर उनका स्वागत किया जाता है ।

पितृपक्ष में इन नियमों का रखें ध्यान

श्राद्ध पक्ष में पितरों के निमित्त किए जाने वाले कर्म श्रद्धा और विधि के साथ किए जाते है । तर्ण, श्राद्ध, पिंडदान या पितरों के प्रतीक स्वरूप किए जाने वाले पूजन में स्थानीय परंपरा और अपने परिवार की मान्यता का भी ध्यान रखना चाहिए।