Dharm Desk : पितृ पक्ष की शुरुआत होते ही घर-परिवार में पूर्वजों के लिए तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य का सिलसिला शुरू हो जाता है। पूर्वजों की तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म किया जाता है। खास तौर पर जिस दिन घर में किसी पूर्वज का श्राद्ध होता है, उस दिन कुछ कामों को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इन्हीं में एक बात घर के कूड़े से जुड़ी है। मान्यता हे कि अगर श्राद्ध वाले दिन घर से कूड़ा उठाने वाला व्यक्ति दरवाजे पर आए, तो उस दिन कूड़ा बाहर नहीं दें। ऐसी मान्यता है कि श्राद्ध के दिन पितरों का स्मरण करते हुए घर के मुख्य द्वार और आस-पास के स्थान को साफ-सुथरा रखा जाना चाहिए। इसलिए कूड़ा अगले दिन देने की बात कही जाती है।

श्राद्ध वाले दिन इन कामों से भी बचें
श्राद्ध तिथि पर कपड़े धोने से भी परहेज करें। इसी तरह इस दिन महिलाएं सिर धोना या बाल धोने से बचने की बात भी कई परिवारों में कही जाती है। श्राद्ध के दिन घर में सात्विक वातावरण बनाए रखने। पूर्वजों का स्मरण करने और श्राद्ध कर्म पर ध्यान दे। इस दिन अनावश्यक कामों से बचकर तर्पण, पिंडदान, दान और ब्राह्मण भोजन जैसे निर्धारित कर्म पूरे किए जाते है।
जिस तिथि को हुआ निधन, उसी तिथि पर श्राद्ध
पूर्वज का जिस हिंदू तिथि पर निधन हुआ हो । उसी तिथि के अनुसार, हर साल श्राद्ध करने की परंपरा है। इस दिन तर्पण, पिंडदान और भोजन आदि कर्म परिवार की परंपरा और विधि के अनुसार किए जाते हैं। जिन लोगों को किसी पूर्वज की मृत्यु तिथि मालूम नहीं होती, उनके लिए पितृ पक्ष की सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करने की परंपरा भी प्रचलित है।
पितृ पक्ष कब से शुरू होगा?
इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर, शनिवार को भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध से होगी। इसके अगले दिन 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध किया जाएगा। पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। इन दिनों पूर्वजों का स्मरण, तर्पण और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करें।
पितृ पक्ष की प्रमुख तिथियां
- पूर्णिमा श्राद्ध – 26 सितंबर 2026
- प्रतिपदा श्राद्ध – 27 सितंबर 2026
- सर्वपितृ अमावस्या – 10 अक्टूबर 2026



