सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता मेट्रो में देरी पर पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि ये सिर्फ अधिकारियों के अड़ियल रवैये को दिखाता है, जिसके तहत वो कोलकाता शहर में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट में देरी करना और उसे रोकना चाहते हैं.  कोलकाता मेट्रो परियोजना में देरी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI Surya Kant) की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट बेंच ने साफ शब्दों में कहा कि विकास कार्यों को चुनाव या त्योहारों के बहाने टालना ‘संवैधानिक कर्तव्य की अवहेलना’ है.

सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता मेट्रो परियोजना में देरी होने को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार से निराशा जाहिर की है. अदालत ने कहा कि उन्हें लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार से इस लापरवाही उम्मीद नहीं करते.

दरअसल कोलकाता मेट्रो की ऑरेंज लाइन के एक अहम हिस्से को पूरा करने में हो रही अनिश्चित देरी को लेकर याचिका दाखिल की गई थी. इस याचिका में देरी का कारण पश्चिम बंगाल सरकार के जरूरी मंजूरी नहीं दिए जाने को बताया गया था.

ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने निराशा जताते हुए कहा कि हम लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार से ये उम्मीद नहीं करते कि वो ये कहे कि इस काम को फिलहाल नजरअंदाज कर दिया जाए. CJI ने निर्देश दिया कि हर चीज का राजनीति करण न किया जाए, क्योंकि ये विकास से जुड़ा मुद्दा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हाई कोर्ट के दिए गए आदेश में कोई कमी नहीं थी. हमें पूरा भरोसा है कि ये प्रोजेक्ट तय समय सीमा के अंदर ही पूरा किया जाएगा.

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, ‘आपके लिए विकास से ज्यादा त्योहार जरूरी हैं. ऐसा नहीं है कि आप अपनी मर्जी से कर रहे हैं, आप अपने कर्तव्य से बंधे हैं. आपने हाई कोर्ट से कहा था कि आपको त्योहारों का इंतजाम करना है. परिवहन के लिए एक अहम सड़क बनाने से ज्यादा जरूरी त्योहार हैं.’

कोर्ट ने कहा अगर चुनाव आयोग को चुनाव कराने में कोई दिक्कत नहीं है तो ये प्रोजेक्ट तो आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू होने से पहले का है. ऐसे में राज्य सरकार को ये बहाना बनाकर विकास के काम को फिर से रोकने की इजाजत नहीं दी जाएगी.

आज सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने मई तक का समय मांगा. उन्होंने कहा कि अभी चुनाव चल रहे हैं, इसलिए देरी हो रही है.

CJI जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कोलकाता मेट्रो में देरी को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट के ट्रैफिक ब्लॉक किए जाने के आदेश के खिलाफ सरकार की अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया. राज्य सरकार की ओर से उस रास्ते से एम्बुलेंस आती-जाती हैं. यहां तक कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट वाली गाड़ियां भी उसी रास्ते से गुजरते हैं.

वहीं, कोलकाता मेट्रो के वकील ने कहा कि उन्हें अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दी जाए. इस पर जस्टिस बागची ने कहा, ‘आपको वो मौका दिया गया था लेकिन आपने उसका फायदा नहीं उठाया. हम आपको याचिका वापस लेने की अनुमति नहीं देंगे.’

सीजेआई ने कहा कि हाई कोर्ट ने बहुत नरमी बरती है. ये एक ऐसा मामला था जहां मुख्य सचिव और DGP के खिलाफ कोई कार्रवाई की जानी चाहिए थी. ये अपने कर्तव्य को लेकर पूरी तरह से लापरवाही दिखाता है. अदालत के मुताबिक, ‘ये सिर्फ एक ऐसे मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश है, जहां असल में कोई मुद्दा ही नहीं है.’

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