मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने विधानसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि बचे हुए माओवादी कैडर सिर्फ़ कंधमाल, कालाहांडी और रायगड़ा ज़िलों के कुछ इलाकों तक ही सीमित हैं। उन्होंने 31 मार्च, 2026 तक वामपंथी उग्रवाद (LWE) को खत्म करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए ओडिशा की प्रतिबद्धता को दोहराया।
माझी ने बताया कि पिछले दो सालों में 96 माओवादियों और मिलिशिया सदस्यों ने सरेंडर किया है, जो उग्रवादी गतिविधियों में लगातार आ रही कमी को दिखाता है।
कंधमाल इस समय ओडिशा का एकमात्र माओवाद प्रभावित ज़िला है, जबकि मालकानगिरी, कोरापुट, नुआपाड़ा और बालांगीर समेत आठ अन्य ज़िलों को अब “विरासत और ज़ोर वाले क्षेत्र” (legacy and thrust zones) के तौर पर वर्गीकृत किया गया है।

ओडिशा के ताज़ा आँकड़े बताते हैं कि राज्य इस डेडलाइन को पूरा करने की सही राह पर है, जो भारत के सभी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को उग्रवाद से मुक्त बनाने के बड़े अभियान में एक अहम कदम है।
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