हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में किसानों के हक और अधिकार की लड़ाई का दावा करने वाली कांग्रेस अब अपने ही प्रचार को लेकर सवालों में घिरती नजर आ रही है। आगरा-बॉम्बे नेशनल हाईवे पर किए गए चक्का जाम आंदोलन के दौरान एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है। कांग्रेस द्वारा लगाए गए पोस्टर में साफ तौर पर “किसानों के हक और अधिकार के लिए चक्का जाम आंदोलन” लिखा गया है, लेकिन पोस्टर में दिखाई गई भीड़ को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।पोस्टर में जिस भीड़ की तस्वीर लगाई गई है, उसमें लोगों के सिर पर आम आदमी पार्टी की पहचान—टोपी और झाड़ू का निशान—स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है।
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ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस अपने आंदोलन को बड़ा दिखाने के लिए दूसरी पार्टी की तस्वीरों का इस्तेमाल कर रही है? राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्ष इसे कांग्रेस की “फोटो पॉलिटिक्स” बता रहा है, तो वहीं आम जनता के बीच भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। किसानों के मुद्दे पर सियासत नई नहीं है, लेकिन इस तरह की तस्वीरों का इस्तेमाल यह जरूर दिखाता है कि जमीनी हकीकत और राजनीतिक दावों में कितना फर्क है।
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फिलहाल, इस पूरे मामले पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े ने कहा कि मेरी जानकारी में नहीं है मैं अभी इस मामले को दिखाता हूं हालांकि जिस ट्रैक्टर पर चढ़कर विपिन वानखेड़े और कांग्रेस नेता चक्का जाम कर रहे थे भाषण भाजी हो रही थी यह इस ट्रैक्टर ट्राली के नीचे लगा हुआ पोस्ट है। अब राजनीतिक गलियारों में यह पोस्ट चर्चा का विषय बना हुआ है।
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