कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आज माधवराव सिंधिया की 25वीं पुण्यतिथि पर उनकी छत्री पर श्रद्धांजलि अर्पित करने लोग पहुंचे,लेकिन श्रद्धांजलि के बीच एक बयान ने सियासी चर्चा को हवा दे दी। कांग्रेस के शहर जिला अध्यक्ष सुरेंद्र यादव ने माधवराव सिंधिया की पुण्यतिथि को जयंती बता दिया। इसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि जो कांग्रेस माधवराव सिंधिया को अपने दिल में रखने की बात करती है, उसके जिला अध्यक्ष को यह तक पता नहीं कि आज जयंती नहीं, बल्कि पुण्यतिथि है।
दरअसल माधवराव सिंधिया की राजनीतिक विरासत को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी दावे भी सामने आते रहे हैं। खासकर 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में जाने के बाद ग्वालियर-चंबल में माधवराव सिंधिया की पुण्यतिथि पर बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी को कांग्रेस अलग नजरिए से देखती है। कांग्रेस का कहना है कि माधवराव सिंधिया जीवन के अंतिम समय तक कांग्रेस में रहे, जबकि बीजेपी की ओर से उनकी विरासत और योगदान को दलगत सीमाओं से अलग बताया जाता है।यही वजह है कि ग्वालियर की कटोराताल स्थित माधवराव सिंधिया की छत्री,जहां आज उनकी 25वीं पुण्यतिथि पर कांग्रेस और बीजेपी समेत अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े लोग श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे,माधवराव सिंधिया का निधन 30 सितंबर 2001 को विमान हादसे में हुआ था। उस समय वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद थे,लेकिन इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बीच कांग्रेस के शहर जिला अध्यक्ष सुरेंद्र यादव के एक बयान ने राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया।उन्होंने पुण्यतिथि की जगह इसे जयंती बता दिया।इसके बाद बीजेपी ने इसी गलती को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा।
बीजेपी जिला उपाध्यक्ष सतेंद्र शर्मा का कहना है कि कांग्रेस आज भी माधवराव सिंधिया को अपने दिल में रखने की बात करती है,लेकिन उसके जिला अध्यक्ष को उनकी जयंती और पुण्यतिथि में अंतर तक पता नहीं है। बीजेपी ने कहा कि इसके बावजूद उन्होंने माधवराव सिंधिया को श्रद्धांजलि दी,इसके लिए कांग्रेस जिला अध्यक्ष को धन्यवाद।
वहीं, माधवराव सिंधिया की राजनीतिक विरासत को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच अलग-अलग दावे भी सामने आते रहे हैं।कांग्रेस का तर्क है कि माधवराव सिंधिया ने अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम दौर तक कांग्रेस के साथ काम किया और उनका राजनीतिक रिकॉर्ड कांग्रेस से जुड़ा रहा। संसद के रिकॉर्ड में भी उनके निधन के समय उनके कांग्रेस नेता और सांसद होने का उल्लेख है। दूसरी तरफ, 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद ग्वालियर-चंबल की राजनीति में सिंधिया परिवार की राजनीतिक विरासत को लेकर नया विमर्श सामने आया।ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 11 मार्च 2020 को बीजेपी की सदस्यता ली थी।
अब सवाल यह है कि माधवराव सिंधिया की विरासत को लेकर बीजेपी और कांग्रेस अपने-अपने राजनीतिक संदर्भ में जिस तरह श्रद्धांजलि और दावे कर रहे हैं, उसका स्थानीय राजनीति पर क्या असर है?,इसी बीच, पुण्यतिथि को जयंती बताए जाने की कांग्रेस जिलाध्यक्ष की चूक ने इस पूरे राजनीतिक विमर्श को एक नया मुद्दा जरूर दे दिया है।
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