संजय पाटीदार, भोपाल। मध्य प्रदेश में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बाद अब बिजली विभाग के कर्मचारियों ने भी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। आगामी दिवाली के त्यौहार पर प्रदेशभर में अंधेरे का संकट गहरा सकता है। प्रदेश की छह बिजली कंपनियों में कार्यरत लगभग 45 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 7 और 8 नवंबर को ‘काम बंद आंदोलन’ की चेतावनी दी है। त्यौहार के मौके पर न कचरा उठने और न ही बिजली बंद होने पर सुधरने की स्थिति से आम जनता की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।
बैठक में बनी आंदोलन की रणनीति
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मध्य क्षेत्र बिजली कंपनी के गोविंदपुरा स्थित ‘निष्ठा परिसर’ में आउटसोर्स कर्मचारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कर्मचारियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया, तो वे 7 और 8 नवंबर को पूरे प्रदेश में दो दिवसीय काम बंद हड़ताल पर चले जाएंगे। आउटसोर्स कर्मचारी बिजली व्यवस्था के रखरखाव और तकनीकी फॉल्ट सुधारने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। ऐसे में दिवाली के त्यौहार के ठीक पहले उनकी इस चेतावनी से पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है।
वेतन वृद्धि और ठेका प्रथा बंद करने की मांग
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर शासन-प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में वेतन में सम्मानजनक वृद्धि, संविलियन/नियमितीकरण (Regularization) की प्रक्रिया शुरू करना और बिजली विभागों से ठेका प्रथा को पूरी तरह समाप्त करना शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन की राह पर आगे बढ़ने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है। यदि 7 और 8 नवंबर को यह हड़ताल होती है, तो दिवाली के दौरान बिजली सप्लाई ठप होने पर सुधार कार्य पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।
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