Column By- Ashish Tiwari , Resident Editor

एमडी-अध्यक्ष आमने-सामने

दम निचोड़कर कोशिश की गई थी कि एक ब्लैक लिस्टेड कंपनी को टेंडर में शामिल कर लिया जाए, मगर एमडी की एक चिट्ठी ने पूरी कवायद पर मिट्टी डाल दिया. मामला बीज निगम से जुड़ा है. मंत्री रविंद्र चौबे की विधानसभा में की गई घोषणा के बाद 9 सितंबर 2020 को मेसर्स त्रिमूर्ति प्लांट साइंस प्राइवेट लिमिटेड को बीज निगम ने ब्लैक लिस्ट कर दिया था. इधर बीज निगम के अध्यक्ष की मेहरबानी रही कि 17 अक्टूबर 2021 को एक चिट्ठी लिखकर उन्होंने ब्लैक लिस्ट कंपनी का बकाया 3 करोड़ रुपए जारी करने का फरमान दे दिया. इतना ही नहीं अध्यक्ष ने 23 अक्टूबर 2021 को ब्लैक लिस्ट किए जाने वाले आदेश को निरस्त कर दिया. बताते हैं कि मक्का बीज की खरीदी के लिए जारी होने वाले टेंडर में ब्लैक लिस्ट में शामिल की गई कंपनी मेसर्स त्रिमूर्ति प्लांट साइंस प्राइवेट लिमिटेड हिस्सा ले सके, इसलिए ये मेहरबानी की गई थी. यहां तक तो मामला स्मूथली चलता रहा, लेकिन प्लानिंग तब चौपट हो गई, जब एमडी ने अध्यक्ष की चिट्ठी को अधिकारिता विहीन करार दे दिया. बकायदा एमडी की ओर से कंपनी को चिट्ठी भेजी गई, जिसमें कहा गया कि 9 सितंबर 2020 को ब्लैक लिस्ट किए जाने वाला आदेश ही अंतिम माना जाएगा. फिलहाल कंपनी टेंडर से बाहर हो गई है और अध्यक्ष सिर पीट रहे हैं. बात यहां खत्म हो गई है या फिर शुरू यह आने वाला वक्त बताएगा.

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करोड़ों का केबिन

भले ही विरासत में संघर्ष जुड़ा हो लेकिन ब्यूरोक्रेसी में आने के बाद कइयों के आदत व्यवहार में एलीट क्लास बसना आम बात है. सूबे के एक आईएएस अपने इस कौशल के लिए खूब पहचाने जाते हैं. नया रायपुर के एक सरकारी इमारत में साज सज्जा युक्त दफ्तर को नए सिरे से रिनोवेट कराने का जो सिलसिला उन्होंने शुरू किया था, उनके लौटने के बाद तक खत्म नहीं हो सका. सुना है कि मंत्रालय में मुख्यमंत्री के दफ्तर की जो भव्यता नहीं, विकास को गति देने वाले इस इमारत में वह तमाम साजोसमान जुटाए गए. इस पर करोड़ों रुपये खर्च किये हुए. अब एक सीनियर आईएएस जिसे लेकर ये कहा जाता है कि वह शासन का पानी तक नहीं पीती, दफ्तर बनने के बाद से अब तक वहां बैठी तक नहीं. विभाग से जुड़ी फाइलें सीधे मंत्रालय बुलाई जाती हैं. बहरहाल आलीशान दफ्तर तैयार है और इसकी बादशाहत किसके हिस्से आएगी? ये सवाल बना हुआ है.

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मंत्री की तनी भृकुटी, निलंबित हुए उप संचालक

संस्कृति विभाग के उप संचालक उमेश मिश्रा निलंबित कर दिए गए. विभागीय मंत्री की भृकुटि तन गई थी. अक्टूबर महीने में मंत्री ने सीधे ही निलंबन की नोट शीट चलाई थी, पर अधिकारियों ने मंत्री के कद को कमतर आंका. मंत्री ने कई दफे रिमाइंडर भेजा. अधिकारियों की परेड भी लगा दी. लेकिन कानों में जूं तक नहीं रेंगी. निलंबन का आदेश दो महीने की कदम ताल के बाद जारी हो सका. अब इस आदेश का दिलचस्प पहलू देखिए. मंत्री ने अपनी नोटशीट में जो विवरण लिखा था, निलंबन आदेश में उसे ही आधार बना दिया. निलंबन आदेश में दो टूक लिखा गया, ” मंत्री कार्यालय में कार्यरत अधिकारियों/ कर्मचारियों से समन्वय स्थापित नहीं होने की वजह से निलंबित किया जाता है”. यह आदेश प्रशासनिक गलियारों में जमकर सुर्खियां बटोर रहा है.

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सर्विस रिव्यू कमेटी की बैठक में क्या ?

बीते 4 दिसंबर को सर्विस रिव्यू कमेटी की बैठक हुई. मुख्य सचिव अमिताभ जैन की अध्यक्षता में हुई कमेटी की बैठक में एसीएस होम सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ, डीजीपी अशोक जुनेजा के साथ राजस्थान कैडर से 1988 बैच के सीनियर आईपीएस अधिकारी बी एल सोनी शामिल रहे. कमेटी ने सीनियर आईपीएस मुकेश गुप्ता, जी पी सिंह, एसआरपी कल्लूरी और मिंथुओ तुंगो को कंपलसरी रिटायरमेंट की अनुशंसा की है. मुकेश गुप्ता और जीपी सिंह के खिलाफ मामले चल रहे हैं. वहीं इंटर स्टेट डेपुटेशन पर नागालैंड गए तुंगो 2017 में डेपुटेशन खत्म होने के बाद से अब तक लौटे नहीं है. पुलिस मुख्यालय ने नोटिस भी जारी किया, लेकिन उनका कोई अता-पता नहीं. सो वह भी कमेटी की अनुशंसा की जद में आ गए. एसआरपी कल्लूरी का नाम लिस्ट में होना चौंकाता जरूर है. हाल फिलहाल में उनके खिलाफ ऐसा कोई बड़ा मसला रहा नहीं, लेकिन सुना है कि सरगुजा में पोस्टिंग के दौरान के कुछ मसले को आधार बनाते हुए उनका नाम भी सूची में डाल दिया गया है. सुनाई पड़ा है कि दिल्ली भेजे गए एक नाम पर सोनी अड़ गए थे. वह नियमों का हवाला देते रहे. वैसे सोनी जिस बैच से आते हैं, सर्विस रिव्यू किये जाने वाले आईपीएस भी उसी बैच से थे. बताते हैं कि जिन चार आईपीएस अधिकारियों की सर्विस खत्म करने की अनुशंसा केंद्र को भेजी गई है, उनमें से कईयों ने दिल्ली के अपने संपर्कों को साधने की कवायद तेज कर दी है.

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स्पीड से दौड़ी फाइल

सर्विस रिव्यू कमेटी के बाद अनुशंसा को सरकार की मंजूरी दिलाने वाली फाइल तेजी से दौड़ाई गई. 4 दिसंबर को बैठक हुई. 5 दिसम्बर को रविवार था लेकिन सुनने में आया है कि फाइल सरकार की मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री तक पहुँच चुकी थी. 6 को मुख्यमंत्री की मंजूरी मिली और 7 दिसंबर को दिल्ली भेज दिया गया.

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हुनरमंद नौकरशाह !

हमारे यहाँ रचनाधर्मी लोगों की कोई कमी नहीं. ये तबका रास्ता ढूँढता नहीं है, सृजन कर लेता है. अब देखिए आवक जब बढ़ी तो ज़मीनों में निवेश का रुख़ किया. नौकरशाह हैं, ज़ाहिर है सीमाओं का अपना बंधन है. लेकिन हुनर तो हुनर है. ज़मीन पर निवेश की पुरातन परंपरा को थोड़ा मोडिफ़ाई कर लिया गया है. बताते हैं कि ज़मीन के बड़े-बड़े पैच ख़रीदने से पहले ज़मीन का डायवर्सन कैंसल कराया जा रहा है. आवासीय उपयोग की भूमि कृषि में बदली जा रही. रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर के आउटर्स पहली पसंद बने हैं. डायवर्सन बदलने से गाइडलाइन वैल्यू घट रही है. कच्चे में इन्वेस्टमेंट धड़ाके से जारी है.

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आईएएस एकता

अखिल भारतीय सेवा में आईएएस ही हैं जिनमें ग़ज़ब की एकता दिखती है. एकता ज़िंदाबाद का नारा दूसरी सर्विसेस में देखने नहीं मिलता. मुंगेली की घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया. ज़िला पंचायत सीईओ पर चप्पल तानने वाली महिला नेत्री के मामले में आईएएस एसोसिएशन उखड़ पड़ा. अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करने में एसोसिएशन ने ज़रा सा भी इंतज़ार नहीं किया. घटना घटी और देर शाम तक मुख्यमंत्री तक संदेशा भेज दिया गया कि ऐसा होता रहा तो काम करना मुश्किल हो जाएगा.

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ढहते हुए क़िले के पहरेदार बने डहरिया

अब कौन जानता था नतीजे इस तरह से आएँगे. जिस क़िले को ढहता हुआ बताकर एक शीर्षस्थ नेता ने पहरेदारी से इंकार कर दिया था, उस क़िले पर शिव डहरिया की पहरेदारी में कांग्रेस ने जीत का पताका लहरा दिया. इस निकाय चुनाव में कोरिया ज़िले की शिवपुर चरचा और बैकुंठपुर को कांग्रेस कमजोर मान रही थी, लेकिन बाज़ी ऐसे पलटी कि नतीजों से सब हैरान रह गए. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सामने मंत्री का क़द और बढ़ गया. दिल्ली और यूपी के दौरे से लौटते ही एयरपोर्ट पर मंत्री की मुख्यमंत्री ने सबके सामने पीठ भी थपथपा दी.

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