अब डंपर वाले माननीय

मंत्रालय से लेकर सियासी गलियारों में इस वक्त एक चर्चा बड़ी गर्म है। चर्चा माननीय के व्यक्तिगत प्रमोशन की है। दरअसल, माननीय से एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं बल्कि पूरे आधा दर्जन डंपर लिए… लिए शब्द इसलिए क्योंकि यह खरीदे या फिर किसी की मेहरबानी हुई। इस विषय में फिलहाल तो नहीं कहा जा सकता। हालांकि माननीय जिस क्षेत्र से आते हैं वह क्षेत्र रेत खनन के लिए कुख्यात है और माननीय उस क्षेत्र में विख्यात। वैसे भारी भरकम डंपर माननीय ने अपने दूर के परिजनों के नाम पर लिए हैं। खैर…चर्चा ये भी है कि अब स्थानीय लोगों के साथ महकमे वालों को कुछ और रोजगार मिलेगा।

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अफसर को निपटाने ऐसा प्लान

बीते दिनों राजधानी की एक बैठक में एक IAS अधिकारी को लेकर जमकर हंगामा हुआ। साहब बैठक में नहीं थे, लिहाजा माननीयों ने ऐसे अपमान माना और बैठक खत्म कर निकल लिए, लेकिन अंदर की कहानी ये है कि महोदय को निपटाने के लिए पहले ही पटकथा तैयार की गई थी। साहिबा ने ही जानकारी नहीं पहुंचाने का फरमान पहले ही दिया था और जब नहीं पहुंचे तो हंगामा। दरअसल, अफसर किसी तुर्रम खां से कम नहीं, जनप्रतिनिधियों को समझते हैं अपने अधीनस्थ कर्मचारी, कांड करने की सूझबूझ तो जनप्रतिनिधियों की जन्मजात देन मानिए। ऐसे में दो जनप्रतिनिधियों ने पहले ही सलाह की और प्रपंच हुआ। हालांकि इस कांड से साहब को घंटा फर्क नहीं पड़ा, पहले का रवैया अब और दोगुना हो गया।

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आलाकमान की बैठक से पहले जिला अध्यक्षों की ट्रेनिंग

3 अप्रैल को मध्यप्रदेश कांग्रेस के तमाम जिला अध्यक्षों को दिल्ली बुलाया गया है। दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उनके साथ बैठक करेंगे, लेकिन बैठक से पहले मध्यप्रदेश कांग्रेस के जिला अध्यक्षों की ट्रेनिंग लेने जा रही है, जिसमें उनकों ये बताया जाएगा कि प्रदेश में कितने बूथ हैं, कितने ब्लॉक अध्यक्ष हैं और इसके अलावा अगर राहुल गांधी के सामने बोलने का मौका मिला तो क्या कुछ कहना है। यानी ये कह सकते हैं एमपी कांग्रेस जिला अध्यक्षों को पहले से बताएगी की कि राहुल गांधी के सामने क्या कुछ बोलना है अपने मन का आलाकमान के सामने कुछ नहीं बोलना है।

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सत्ताधारी दल के खुद को करीबी दिखाने में जुटे अधिकारी

राजधानी भोपाल में पदस्थ एक आईपीएस अधिकारी खुद को सत्ताधारी दल के नजदीक बताने के लिए खुले तौर पर बातें करते नजर आते…साहब सार्वजनिक जगह पर कहते हुए सुनाई दिए कि पहले लुका छुपी का खेल चलता था लेकिन अब खुला खेल फर्रुखाबादी का चल रहा है। सताधारी दल के करीबी अगर हम नजर आ रहे हैं तो हमारे लिए अच्छा ही है विपक्ष के करीब होते तो दिक्कत होती।

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