राजकुमार पाण्डेय की कलम से

अब हिंदू संहिता लिखने की किसकी जिम्मेदारी

बात बहुत उंची और सम्मानजनक पद पर बैठने वाली विभूतियों की है. चर्चा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय से लेकर गौमाता जैसे अहम विषयों को लेकर जारी थी. सबके अपने-अपने तर्क थे. तभी सामाजिक संगठन से जुड़े एक बड़े पदाधिकारी का तर्क आया तो सबका सोचने का नजरिया ही बदल गया. तर्क दिया गया कि हम राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय मुद्दों पर मंथन कर रहे हैं और अपना-अपना मूल काम ही नहीं कर रहे हैं. मनु स्मृति या अन्य विषयों पर जो आपत्तियां हैं, आज से समाज के हिसाब से वो दूर क्यों नहीं की जातीं. आदि शंकराचार्य तो अपना काम कर गए, लेकिन अब हिंदुओं के भविष्य और आगे की संस्कृति को ध्यान में रखते हुए पीठों से हिंदू स्मृति नहीं लिखी जा रही. आखिर आगे के लिए रास्ता दिखाने का काम किसका है.

विधायकजी की तांत्रिक पूजा

मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच विधायकजी की तांत्रिक पूजा की जिले में बड़ी चर्चा है. इधर, फेरबदल की अटकलें शुरू हुईं और उधर तांत्रिक पूजा हुई. पूजन के दौरान माननीय को पूरी उम्मीद थी कि बस अब सरकार में एंट्री होने ही वाली है, लेकिन विस्तार पर फिलहाल ब्रेक लगने से माननीय कुछ उदास जरूर हो गए हैं. लेकिन अभी भी उन्हें उम्मीद है कि जब विस्तार की बात आएगी तब यह तांत्रिक पूजा जरूर काम आएगी.

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मैं इधर भी आपका, उधर भी आपका

वैसे तो होली का रंग उत्साह-उमंग के साथ गिले-शिकवे भुलाकर एक करने का काम भी करता है, लेकिन एक बड़े कद के नेताजी ने इस रंग का उपयोग अवसरवादिता के रूप में उपयोग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. जमावट इस तरह की गई कि हर दीये में बराबरी से तेल जाता रहे. नेताजी होली से लेकर रंग पंचमी तक प्रमुख चौखटों तक बराबरी से रंग-गुलाल उड़ाते नजर आए.

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होली की पार्टी से निकलेगा रास्ता

पुलिस महकमे के युवा और ओहदेदार अफसर एक प्रमुख जिले में तैनाती के लिए लंबे समय से जोर लगाए हुए हैं, लेकिन दाल है कि गल ही नहीं रही. अब रास्ता निकालने के लिए रंग का सहारा लिया गया. भैया होली की पार्टी की तैयारी करने की सोच ही रहे थे, कि भनक लगते ही असफर ने आगे आकर पार्टी की जिम्मेदारी ले डाली. भैया की पार्टी में जमकर रंग उड़ा और मेहमानों ने मय पड़ोसी भरपेट भोजन भी किया. अफसर महोदय मानकर चल रहे हैं कि पार्टी की खुशी में भैया की सहमति बन ही जाएगी और अब जिले में तैनाती हो ही जाएगी.

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