राजकुमार पाण्डेय की कलम से

कमिश्नर बनने के लिए लगाया एड़ी चोटी का जोर

हाल ही में कुछ प्रशासनिक तबादले हुए तो साहब को उम्मीद थी कोई बड़ा नगर निगम मिल ही जाएगा, लेकिन ऐसा हो नहीं सका. दूसरी लिस्ट आने की सुगबुगाहट तेज हुई तो साहब कमिश्नर का पद पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए हैं. इसके लिए सारे समीकरण जोर शोर से खंगाले जा रहे हैं.

दिल्ली में मुलाकातें, विधायक हुए सक्रिय

दिल्ली में हुईं मुलाकातों के बाद मंत्रिमंडल का सपना संजोए विधायक एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं. विधायकों को उम्मीद है, जिस वक्त का उन्हें इंतजार था वो नजदीक है. ऐसे में विधायकों ने अपने-अपने स्तर पर जोर लगाना शुरू कर दिया है. हालांकि सब जानते हैं कि जैसा दिखता है, पार्टी में वैसा होना थोड़ा मुश्किल ही रहता है.

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सहमति सबकी, लेकिन मैसेज भी तो देना जरूरी है

विधानसभा का सत्र कब तक चले, सत्ता और विपक्ष का जवाब तो यही रहता था कि पूरी बैठकें हों, लेकिन सबके मन ही मन में होली की छुट्टियां घर कर ही रही थीं. अध्यक्ष जी से तो कई सदस्य जल्दी छुट्टियां देने की गुहार तक लगा चुके थे. सदस्यों की मंशा के अनुसार सत्र समापन की तैयारी की गई. इसके लिए दोनों पक्षों के कुछ सदस्यों से राय-मशवरा भी हुआ, लेकिन जैसे ही सत्र समापन की बारी आई, विपक्ष का रुख देखकर सत्ता पलाश हैरान रह गया. कुछ सदस्य जरूर समझ गए कि जनता को मैसेज देना भी तो जरूरी है.

सबसे अधिक पीएस को हो रही परेशानी

सूबे के मुखिया ने मंत्रालय में उपस्थित के निर्देश दिए तो सबसे अधिक प्रभावित प्रमुख सचिव हो गए. साहब ने नियम ही बना लिया था सप्ताह में 3 दिन का. नियम ऐसा कि कार्यालय या तो लंच के ठीक पहले आते थे या लंच के ठीक बाद. अब व्यवस्था ही ऐसी बन गई कि सुबह 10.30 से पहले पीएस को ही बताना होगा कि उनके विभाग में कौन-कौन अनुपस्थित है. पहले दिन जब जल्दबाजी में पीएम ऑफिस पहुंचे उनके समकक्ष अधिकारी ही चुटकी लेते नजर आए.

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जिला स्तर के अधिकारी लगातार 6 महीने से फील्ड में

मंत्रालय के लिए सुबह 10 से शाम 6 बजे तक कि अनिवार्य उपस्थित को लेकर सख्ती हुई तो आंच तहसीलों तक पहुंची. जागरूक मीडिया हाउस ने जिलों में सुबह 10 बजे उपस्थिति की रियल्टी चेक की तो माई के जिले में एक जिला स्तर के अधिकारी परेशान हो गए. लेतलाली के आदि अफसर ने रास्ता निकाला कि उनका काम फील्ड में रहने का है, इसलिए फील्ड में ही रहते हैं. ऑफिस स्टाफ बात करता हुआ नजर आया कि पिछले 6 महीने में साहब एक दिन सुनह 10 बजे कार्यालय नहीं आए हैं. सुबह 10 बजे रोज ही क्या फील्ड में निकल जाते हैं. साहब तो साहब अपने साथ कुछ स्टाफ के लोग भी ले जाते हैं क्या.

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