अफगानिस्तान के साथ सीमा पर चल रहे भीषण युद्ध में अपनी हार और नाकामी को छिपाने के लिए पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने एक बार फिर भारत पर निशाना साधा है। संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए जरदारी ने आरोप लगाया कि भारतीय नेता ‘एक और युद्ध’ की तैयारी कर रहे हैं। इसके अलावा, जरदारी ने भारत से अपील की कि वह ‘युद्ध के मैदान‘ से पीछे हटकर बातचीत की मेज पर लौटे, क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा का यही एकमात्र रास्ता है।

‘जल-आतंकवाद’ का नया बहाना

जरदारी ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को स्थगित करने के भारत के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे ‘हाइड्रो-टेररिज्म‘ (जल-आतंकवाद) करार देते हुए कहा कि नई दिल्ली राजनीतिक लाभ के लिए पानी के बहाव को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने कश्मीर मुद्दे को सुलझाए बिना दक्षिण एशिया में शांति को असंभव बताया और अपना पुराना रुख दोहराया।

तालिबान को चेतावनी और संसद में हंगामा

अफगानिस्तान के मोर्चे पर अपनी विफलता का ठीकरा फोड़ते हुए जरदारी ने तालिबान सरकार पर दोहा समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी धरती ‘पवित्र’ है और वे किसी को इसे अस्थिर करने की अनुमति नहीं देंगे। हालाँकि, जब जरदारी ये बातें कर रहे थे, तब उनकी अपनी संसद में पीटीआई (PTI) सदस्यों ने इमरान खान की रिहाई के नारे लगाकर भारी हंगामा किया, जिससे राष्ट्रपति की बेबसी साफ दिखाई दी।

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