आशुतोष द्विवेदी,रीवा। रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर एक बार फिर विरोध तेज हो गया है। 9 अक्टूबर 2026 को ग्राम पंचायत सरई कला और रोझौही क्षेत्र में बोरहोल का काम कराने पहुंची प्रशासनिक टीम को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में जुटे ग्रामीणों ने एकजुट होकर काम रुकवा दिया और परियोजना को निरस्त करने की मांग उठाई।
विकास चाहिए, लेकिन रेडिएशन का खतरा नहीं!
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने परमाणु ऊर्जा परियोजना से जुड़े संभावित पर्यावरणीय प्रभावों, रेडिएशन और परमाणु कचरे को लेकर चिंता जताई। ग्रामीणों का कहना है कि इस परियोजना से उनके स्वास्थ्य, खेती, जलस्रोतों और आने वाली पीढ़ियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन के सामने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसरों का वे विरोध नहीं कर रहे, लेकिन उनकी सहमति और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज कर परियोजना आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।
पुलिस बल के साथ पहुंचे अधिकारी, ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े
बोरहोल की प्रक्रिया के दौरान मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस बल, एमपीआईडीसी, एनपीसीआईएल और टाटा कंपनी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने और उनकी आशंकाएं दूर करने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। विरोध के चलते बोरहोल का काम आगे नहीं बढ़ सका।
मौके पर सिरमौर तहसीलदार/नायब तहसीलदार बिंदु तिवारी, गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पांडेय, लालगांव चौकी प्रभारी शैल यादव, एमपीआईडीसी के यूके तिवारी, एनपीसीआईएल के वैज्ञानिक श्री जैन तथा टाटा कंपनी के प्रतिनिधि परशुराम मिश्रा सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। स्थानीय सरपंच, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और सामाजिक कार्यकर्ता भी विरोध के दौरान उपस्थित थे।
कथित फर्जी एनओसी का मामला उठा, निष्पक्ष जांच की मांग
प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी एनओसी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरपंच के नाम पर जारी बताए जा रहे पत्र क्रमांक 170/2026 की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका सवाल है कि यदि संबंधित ग्रामसभा और ग्रामीण परियोजना का विरोध कर रहे हैं, तो फिर एनओसी किस आधार पर जारी की गई?
शिवानंद द्विवेदी ने दावा किया कि 3 सितंबर और 5 अक्टूबर 2026 को ग्रामसभा में इस परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित किए गए थे। उन्होंने शासन-प्रशासन से ग्रामसभा के निर्णयों और स्थानीय लोगों की आपत्तियों को गंभीरता से लेने की मांग की। हालांकि, एनओसी के फर्जी होने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
ग्रामीणों की चेतावनी—परियोजना निरस्त होने तक जारी रहेगा आंदोलन
लगातार विरोध के बीच अब प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट का मुद्दा स्थानीय स्तर पर और अधिक गरमा गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक परियोजना को निरस्त नहीं किया जाता और उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन ग्रामीणों की आपत्तियों, ग्रामसभा के प्रस्तावों और कथित एनओसी विवाद की निष्पक्ष जांच कराएगा, या फिर परियोजना को लेकर टकराव आगे भी जारी रहेगा?
फिलहाल, रोझौही और सरई कला क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना को लेकर विरोध जारी है। ग्रामीण विकास के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और ग्रामसभा के अधिकारों पर स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं।
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