मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के मामले में दिल्ली पुलिस ने कम से कम तीन FIR दर्ज की हैं। प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों से जुड़े थे और उन्होंने मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

जंतर-मंतर पहुंचने से पहले रोके गए प्रदर्शनकारी

प्रदर्शन का आह्वान जंतर-मंतर पर किया गया था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसके लिए अनुमति नहीं दी थी। पुलिस ने मध्य दिल्ली में बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जंतर-मंतर के आसपास करीब 750 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि दिल्ली के अन्य हिस्सों से करीब 400 लोगों को पकड़ा गया। सुबह करीब 200 लोगों को नजरबंद किए जाने की भी जानकारी दी गई।

संसद मार्ग और कनॉट प्लेस थानों में FIR

पुलिस के मुताबिक, संसद मार्ग और कनॉट प्लेस थानों में तीन FIR दर्ज की गई हैं। इनमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी आदेश की अवज्ञा के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने बताया कि कार्रवाई BNS की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा के उल्लंघन को लेकर भी की गई।

पुलिस अधिकारी के अनुसार, FIR में किसी व्यक्ति या संगठन को आरोपी के तौर पर नामित नहीं किया गया है। हालांकि, FIR की सामग्री में प्रदर्शन का आह्वान करने वाले आयोजकों और संगठनों तथा प्रदर्शन में शामिल लोगों का उल्लेख किया गया है।

SIR को लेकर उठे सवाल

प्रदर्शन में AAP, AISA, SFI, NSUI, Indian Youth Congress समेत कई छात्र और युवा संगठनों की भागीदारी बताई गई। प्रदर्शनकारियों ने SIR और मतदाता सूचियों में कथित बदलावों को लेकर सवाल उठाते हुए CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

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