चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन रसोई गैस (LPG) की किल्लत और उससे उत्पन्न संभावित संकट ने सदन का माहौल गरमा दिया। राज्य सरकार ने इसे केंद्र सरकार की विफलता करार देते हुए उनके खिलाफ एक निंदा प्रस्ताव पेश किया है, जिस पर आज मतदान होगा।

सदन में चर्चा के दौरान मंत्री लाल चंद कटारूचक ने कहा कि इजरायल और अमेरिका/ईरान के बीच चल रहे तनाव का सीधा असर भारत और विशेष रूप से पंजाब पर पड़ रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि कमर्शियल गैस की आपूर्ति में कटौती शुरू हो गई है, जिससे राज्य के रेस्तरां और अन्य व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने चिंता जताई कि आने वाला समय और भी कठिन हो सकता है, क्योंकि जल्द ही पंजाब में गेहूं की कटाई का सीजन शुरू होने वाला है।

गोदामों में जगह और पैकिंग सामग्री का भी संकट
कटारूचक ने यह भी खुलासा किया कि चावल की धीमी खरीद के कारण राज्य के गोदामों में भंडारण की भारी समस्या है। ऊपर से गेहूं की पैकिंग के लिए बांग्लादेश से आने वाले जूट के थैलों की भारी कमी है। मांग के मुकाबले केवल 3 लाख थैले मिले हैं, जिसके चलते अब 2 लाख प्लास्टिक के थैलों की व्यवस्था करनी पड़ रही है।

विदेशी नीति पर उठे सवाल, विपक्ष पर भी निशाना

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र की विदेश नीति को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “आज स्थिति यह है कि भारतीय कंपनियों के पास केवल 20 दिनों का ही तेल और गैस भंडार बचा है। यह आर्थिक और खाद्य संकट की ओर ले जाने वाला गंभीर विषय है।” वहीं, ‘आप’ विधायक शैरी कलसी ने कहा कि जनता, विशेषकर शादी-विवाह वाले परिवार गैस की कमी से परेशान हैं और भाजपा सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।

सदन में जमकर हुई नारेबाजी

गैस संकट पर चर्चा के दौरान विधानसभा में सत्ता पक्ष की ओर से भाजपा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। विपक्षी दलों की चुप्पी और केंद्र की नीतियों को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस पर विस्तृत चर्चा और कल वोटिंग का फैसला किया है।