चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के बहिष्कार को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेताओं और कैबिनेट मंत्रियों हरपाल सिंह चीमा, अमन अरोड़ा और हरभजन सिंह ईटीओ ने कांग्रेस पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के भाषण का बहिष्कार करना न केवल विधानसभा का अपमान है, बल्कि राज्य की करीब 75 साल पुरानी संसदीय परंपराओं का भी अनादर है।

मंत्रियों ने आरोप लगाया कि सदन में कांग्रेस द्वारा हंगामा और नारेबाजी करना राज्य के विकास कार्यों से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बयान जारी करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के समय पंजाब में शराब, रेत और ट्रांसपोर्ट माफिया का बोलबाला था और राज्य के संसाधनों को खुलकर लूटा गया। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा ‘आप’ सरकार वित्तीय अनुशासन और वास्तविक विकास पर ध्यान दे रही है।

चीमा ने कांग्रेस के व्यवहार को लोकतंत्र विरोधी बताते हुए कहा कि राज्यपाल ने विपक्ष से दो बार शांत होकर बैठने और अपनी बात रखने का आग्रह किया, लेकिन कांग्रेस ने संवैधानिक मर्यादाओं की अनदेखी करते हुए लगातार विरोध जारी रखा।

दलित मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस का रवैया दलित विरोधी रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ, जिन्होंने सिविल सेवा पास कर अधिकारी बनने के बाद राजनीति में आकर जनता की सेवा का रास्ता चुना, उनके बारे में कांग्रेस नेताओं द्वारा की गई टिप्पणी बेहद आपत्तिजनक थी।

वहीं, आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कांग्रेस की कार्रवाई को “शर्मनाक तमाशा” करार दिया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण सदन में सरकार के कामकाज की रिपोर्ट और भविष्य की योजनाओं को पेश करने का महत्वपूर्ण अवसर होता है, लेकिन कांग्रेस ने भाषण शुरू होते ही नारेबाजी कर कार्यवाही बाधित करने का फैसला किया।
अरोड़ा ने कहा कि इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक परंपराओं और विधानसभा की गरिमा के खिलाफ है।