चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। चुनाव में अपनी खोई हुई जमीन वापस हासिल करने के लिए शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने भी कमर कस ली है। पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में पूरे पंजाब को कवर करने वाली तीन चरणों की राजनीतिक यात्रा की तैयारी की जा रही है।

इस अभियान के तहत राज्य के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने की योजना है। खास बात यह है कि यात्रा के प्रत्येक चरण की शुरुआत किसी प्रमुख धार्मिक स्थल से होगी, ताकि पार्टी अपने पारंपरिक पंथिक आधार को फिर से मजबूत कर सके।

10 नवंबर से तलवंडी साबो में शुरू होगा पहला चरण

शिरोमणि अकाली दल की इस राजनीतिक मुहिम का आगाज 10 नवंबर को तलवंडी साबो से होगा। सुखबीर सिंह बादल पहले चरण की अगुवाई करेंगे, जिसके दौरान मालवा क्षेत्र के 65 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। यात्रा के दौरान प्रतिदिन दो विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने की योजना है।

इस अभियान के लिए सुखबीर बादल विशेष रूप से तैयार की गई बस में सड़क मार्ग से सफर करेंगे। अलग-अलग पड़ावों पर पार्टी कार्यकर्ताओं और आम लोगों से संवाद किया जाएगा। इसके जरिए अकाली दल स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने की कोशिश करेगा।

आनंदपुर साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब से भी जुड़ेगा अभियान

यात्रा को तीन चरणों में आयोजित करने की योजना बनाई गई है। पहले चरण की शुरुआत तलवंडी साबो से होगी, जबकि दूसरे चरण का आगाज श्री आनंदपुर साहिब से किया जाएगा। यह चरण दोआबा क्षेत्र पर केंद्रित रहेगा।

तीसरे चरण की शुरुआत श्री अकाल तख्त साहिब से होगी। इसके तहत माझा क्षेत्र को कवर करते हुए यात्रा दमदमा साहिब पर समाप्त होगी। इस तरह अभियान के अलग-अलग चरणों को पंजाब के प्रमुख धार्मिक स्थलों से जोड़ने की रणनीति बनाई गई है।

117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने की तैयारी

अकाली दल की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य राज्य के तीनों प्रमुख क्षेत्रों—मालवा, दोआबा और माझा—में संगठन को सक्रिय करना है। सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने के जरिए पार्टी नेतृत्व को स्थानीय कार्यकर्ताओं और जनता से सीधे संवाद करने का अवसर मिलेगा।

हर पड़ाव पर जनसंपर्क, कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और पार्टी की विचारधारा को लोगों तक पहुंचाने पर जोर रहने की संभावना है। धार्मिक स्थलों से यात्रा की शुरुआत और समापन के जरिए शिअद अपनी पंथिक पहचान को भी राजनीतिक अभियान के केंद्र में रखना चाहती है।

क्या अकाली दल को वापस मिल पाएगा पुराना जनाधार?

पंजाब की राजनीति में शिरोमणि अकाली दल के लिए आगामी विधानसभा चुनाव काफी अहम माने जा रहे हैं। पिछले चुनावों में पार्टी को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। वहीं, नए राजनीतिक समूहों और अन्य दलों की सक्रियता ने पारंपरिक सियासी समीकरणों को भी प्रभावित किया है।

ऐसे में सुखबीर सिंह बादल की प्रस्तावित यात्रा को केवल जनसंपर्क अभियान के तौर पर नहीं, बल्कि संगठन को दोबारा मजबूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। सभी विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचकर पार्टी अपने पुराने समर्थकों से संपर्क बढ़ाने और नए मतदाताओं के बीच अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश करेगी।

हालांकि, इस अभियान का चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल अकाली दल की रणनीति पंजाब के धार्मिक, क्षेत्रीय और राजनीतिक मुद्दों को साथ लेकर चुनावी मैदान में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिखाई दे रही है.