सुपौल। पंजाब के ब्यास शहर में सड़क पार करने के दौरान हुए एक हादसे में बिहार के सुपौल जिले के 25 वर्षीय मजदूर सूरज उरांव की मौत हो गई। तेज रफ्तार कार की टक्कर इतनी भीषण थी कि सूरज ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। दिवाली के शुभ अवसर पर जहां घर में उसके आने की खुशियां मनाई जानी थीं, वहीं त्योहार के दिन उसका शव पैतृक गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया।

​ईंट भट्ठे पर काम खत्म कर स्टेशन जा रहा था युवक

​सूरज उरांव सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड अंतर्गत ग्वालपाड़ा पंचायत के वार्ड संख्या 8 का निवासी था। वह अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए पंजाब के ब्यास में रहकर मजदूरी करता था। हादसे के दिन वह ईंट भट्ठे पर ट्रैक्टर से ईंट लोड करने की अपनी पाली खत्म कर कमरे पर गया और वहां से ट्रेन पकड़ने के लिए रेलवे स्टेशन की ओर निकला था। इसी दौरान पैदल सड़क पार करते समय एक अनियंत्रित कार ने उसे रौंद दिया।

​बहन से फोन पर कही थी आखिरी बात

​सूरज की बहन रीता कुमारी ने रोते हुए बताया कि शुक्रवार शाम करीब 4 बजे उसकी अपने भाई से आखिरी बार बात हुई थी। सूरज ने फोन पर बताया था कि वह स्टेशन के लिए निकल रहा है और दिवाली पर घर पहुंच जाएगा। उसने बच्चों के लिए ढेर सारे गिफ्ट लाने और गांव आकर नई बाइक खरीदने का वादा भी किया था। सूरज की बहन काजल ने बताया कि भाई ने घर आने की बात कही थी, लेकिन उसकी लाश घर पहुंची। इस हादसे ने पूरे परिवार की खुशियां छीन ली हैं।

​मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

​मृतक अपने पीछे पत्नी ललिया देवी और तीन छोटे-छोटे बच्चों को छोड़ गया है। इनमें 3 साल का बेटा संतोष, 2 साल की बेटी साक्षी और महज 8 महीने का मासूम सुशांत शामिल हैं। तीनों छोटे बच्चे इस बात से अनजान हैं कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे, जबकि पत्नी के सामने पूरी जिंदगी गुजारने और बच्चों के पालन-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

​क्षत-विक्षत हो गया था शव, गांव में पसरा सन्नाटा

​मृतक के चचेरे भाई अमित कुमार ने बताया कि हादसा इतना खौफनाक था कि सूरज का शरीर बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया, जिससे पोस्टमॉर्टम कराना भी संभव नहीं हो पाया। कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद जब शव गांव लाया गया तो परिजनों की चीत्कार से माहौल गमगीन हो गया। जिस घर में दिवाली की तैयारियां होनी थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है।