पंजाब/नई दिल्ली, 24 अक्टूबर। पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत श्रद्धालुओं को ले जाने वाली एसी स्लीपर बसों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। आयोग ने बसों में सुरक्षा मानकों के कथित उल्लंघन पर चिंता जताते हुए विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

यह योजना वरिष्ठ नागरिकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोगों को तीर्थ स्थलों की यात्रा कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। हालांकि, योजना में इस्तेमाल हो रही कुछ बसों को लेकर आरोप हैं कि उनमें जरूरी सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।

बसों में सुरक्षा खामियों को लेकर उठे सवाल

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ बसों में बिना अनुमति के संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं। ड्राइवर के केबिन और यात्रियों के बैठने वाले हिस्से के बीच पार्टीशन और दरवाजे लगाए जाने, आपातकालीन निकास के रास्ते बाधित होने और खिड़कियों के इस्तेमाल में रुकावट जैसी समस्याएं सामने रखी गई हैं।

इसके अलावा, आग लगने की स्थिति में चेतावनी देने, आग बुझाने और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए जरूरी इंतजामों में भी कमियां होने की आशंका जताई गई है। इन खामियों के कारण किसी आपात स्थिति में यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती है।

पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस

प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली NHRC की पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत पंजाब सरकार के मुख्य सचिव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दोनों पक्षों से सात दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

आयोग का स्पष्ट रुख है कि किसी भी सरकारी कल्याणकारी योजना के तहत लोगों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से बुजुर्ग तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

सभी बसों के तत्काल निरीक्षण के निर्देश

NHRC ने पंजाब के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे व्यक्तिगत रूप से सुनिश्चित करें कि मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत संचालित सभी बसों का तत्काल और व्यापक निरीक्षण किया जाए।

यदि किसी बस में अनिवार्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन मिलता है, तो उसे कमियां दूर होने और सक्षम प्राधिकारी से नियमों के पालन की पुष्टि मिलने तक संचालन से बाहर रखने को कहा गया है।

मुख्य सचिव की रिपोर्ट में यह भी बताना होगा कि योजना के तहत कुल कितनी बसें चल रही हैं, कितनी बसों की जांच हुई, निरीक्षण में क्या खामियां मिलीं और उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए। इसके साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों की संख्या तथा संबंधित अधिकारियों और बस ऑपरेटरों की जवाबदेही का ब्योरा भी देना होगा।

केंद्र सरकार से भी मांगा गया जवाब

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को बसों के निर्माण और बॉडी डिजाइन से जुड़े लागू मानकों, ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स और केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (CIRT), पुणे के दिशानिर्देशों के अनुपालन की जांच करने को कहा गया है।

मंत्रालय को पिछली कार्रवाई के तहत किए गए सुरक्षा उपायों की समीक्षा करने और यह बताने का निर्देश भी दिया गया है कि असुरक्षित स्लीपर बसों के संचालन तथा गंभीर सड़क हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

पहले भी बसों की सुरक्षा पर चिंता जता चुका है आयोग

NHRC इससे पहले भी बस दुर्घटनाओं और यात्रियों की सुरक्षा में सामने आई खामियों से जुड़े मामलों का संज्ञान ले चुका है। आयोग ने विशेष रूप से उन बसों की बनावट पर चिंता जताई है, जिनमें ड्राइवर के केबिन को यात्री हिस्से से अलग कर दिया जाता है। ऐसी व्यवस्था आग लगने पर सूचना मिलने, संवाद करने और यात्रियों को बाहर निकालने में बाधा बन सकती है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा के मानक अनिवार्य हैं और उनका पालन सुनिश्चित करना जरूरी है। निर्धारित समयसीमा में ठोस कार्रवाई रिपोर्ट नहीं मिलने या केवल सामान्य आश्वासन दिए जाने की स्थिति को गंभीरता से लिया जाएगा।

अब इस मामले में पंजाब सरकार और केंद्र सरकार की रिपोर्ट पर नजर रहेगी। इससे यह स्पष्ट होगा कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए बसों की जांच और नियमों के पालन को लेकर क्या कार्रवाई की गई है।