अंकित तिवारी, रायसेन। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के उदयपुरा स्थित दादा धूनी दरबार में आस्था और भक्ति का एक अत्यंत अनोखा और दिव्य नजारा देखने को मिला है। यहाँ आयोजित 51 दिवसीय महायज्ञ में 1 लाख 51 हजार किलो हवन सामग्री के साथ डेढ़ किलो सोना और 4 किलो से अधिक चांदी के आभूषण दहकती धूनी में माँ नर्मदा को समर्पित किए गए। इस विशाल धार्मिक आयोजन के लिए संत शिवानंद जी महाराज को ‘इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ का विश्व रिकॉर्ड प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया है।

29 जुलाई से शुरू हुआ अनुष्ठान, 8 अक्टूबर तक चलेगा नर्मदा संकीर्तन 

यह भव्य धार्मिक आयोजन गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) से प्रारंभ हुआ था, जो 17 सितंबर तक चला। इसके बाद अब 21 दिनों का नर्मदा संकीर्तन 8 अक्टूबर तक जारी रहेगा। महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे विशाल भंडारे और प्रसादी की व्यवस्था की गई।

251 प्रकार की जड़ी-बूटियाँ और सोने-चांदी की भस्म 

संत शिवानंद महाराज ने बताया कि धूनी साक्षात माँ नर्मदा का स्वरूप है। इसमें श्रृंगार के रूप में फल, फूल, मिठाई, कपड़े और 251 प्रकार की दुर्लभ जड़ी-बूटियों के साथ-साथ सोना और चांदी चढ़ाया जाता है। धूनी में जलकर सोना और चांदी स्वर्ण व रजत भस्म में बदल जाते हैं, जिसे बाद में माँ नर्मदा में विसर्जित किया जाता है। महाराज जी के अनुसार, वे सालभर में अलग-अलग स्थानों पर ऐसे 4 से 5 बड़े आयोजन करते हैं।

बिना चंदे के आयोजन बना रहस्य, संत का 21 करोड़ का चैलेंज 

इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि संत शिवानंद महाराज किसी से भी कोई आर्थिक सहयोग या चंदा नहीं लेते हैं। वे इसे पूरी तरह श्री श्री 1008 दादा धूनी वाले महाराज और माँ नर्मदा की असीम कृपा बताते हैं। संत शिवानंद महाराज ने खुले तौर पर दावा किया है कि यदि दुनिया में कोई भी बिना चंदे के ऐसा भव्य कार्यक्रम करा दे, तो वे उसे 21 करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार देंगे।

(डिस्क्लेमर: यह खबर क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी श्रद्धालुओं की अपार आस्था और दावों पर आधारित है। हमारा न्यूज़ पोर्टल किसी भी प्रकार के अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देता है और न ही ऐसे दावों की पुष्टि करता है।)