Dharm Desk – राज पंचक की शुरुआत हो चुकी है और यह 28 सितंबर की सुबह तक रहेगा। पंचक के इन पांच दिनों में कुछ कामों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की परंपरा है। खासतौर पर घर के निर्माण, लकड़ी से जुड़े काम और दक्षिण दिशा की यात्रा को लेकर धार्मिक-ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार कुछ नियम बताए गए हैं। ऐसे में अगर इन दिनों कोई नया काम शुरू करने की तैयारी है। तो पंचक से जुड़े नियमों को जान लेना जरूरी है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार इस बार पंचक 23 सितंबर की रात 9:57 बजे शुरू हुआ है और 28 सितंबर की सुबह 10:17 बजे तक रहेगा। चंद्रमा जब धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र से होकर गुजरता है।उस अवधि को पंचक कहा जाता है। ये पांचों नक्षत्र कुंभ और मीन राशि से जुड़े हैं। वार के आधार पर पंचक के अलग-अलग नाम बताए गए हैं। इस बार पंचक बुधवार की रात से शुरू हुआ है, इसलिए इसे राज पंचक कहा जा रहा है। पंचक को लेकर अलग-अलग परंपराओं में नियमों में कुछ अंतर भी मिलते हैं।

निर्माण एवं लकड़ी के कार्य में बरतें सतर्कता

पंचक के दौरान मकान की छत डालने या नया निर्माण शुरू करने और लकड़ी से जुड़े कुछ कामों को टालने की परंपरा है। खासतौर पर घर की छत या लेंटर डलवाने का काम पंचक में न करने की सलाह दी जाती है।इसी तरह नई लकड़ी खरीदने, लकड़ी जलाने या लकड़ी से जुड़े बड़े काम शुरू करने को लेकर भी सावधानी बरती जाती है। नया फर्नीचर बनवाने जैसे कामों को भी कई परिवार पंचक खत्म होने के बाद करना पसंद करते हैं।

दक्षिण दिशा की यात्रा व मृत्यु के समय ध्यान रखने वाली बातें

पंचक में दक्षिण दिशा की यात्रा को लेकर भी खास सावधानी बताई जाती है। दक्षिण दिशा को यम की दिशा मानी जाती है।इसलिए इस समय लंबी यात्रा को टालने की परंपरा है। और अगर यात्रा जरूरी हो तो सिर्फ पंचक के कारण दैनिक जीवन के जरूरी काम रोकना जरूरी नहीं है। यदि पंचक के समय किसी इंसान की मृत्यु हो जाए तो अंतिम संस्कार से जुड़े नियमों को लेकर परिवार को स्थानीय परंपरा और योग्य पंडित की सलाह लेनी चाहिए। कुछ परंपराओं में पंचक शांति के लिए विशेष विधि कराने का उल्लेख मिलता है।

दैनिक कार्यों पर नहीं है रोक

पंचक का मतलब यह नहीं होता कि इन पांच दिनों में हर काम बंद कर दिया जाए। नौकरी, व्यापार और सामान्य दैनिक कार्य किए जा सकते हैं। वहीं शादी, गृह प्रवेश, नया वाहन या किसी बड़े मांगलिक काम के लिए उस दिन की तिथि, नक्षत्र और शुभ मुहूर्त देखकर फैसले लेना सही माना जाता है। इसलिए पंचक के समय जरूरी काम करने से घबराने के बजाय उन कार्यों पर विशेष ध्यान देना चाहिए जिनके लिए पंचांग में अलग से सावधानी बताई गई है।