Rajasthan Assembly: राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में आज शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने अजमेर नगर निगम में चल रही कथित अनियमितताओं का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। भाटी द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर जवाब देते हुए नगरीय विकास राज्य मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

विधायक रविंद्र भाटी ने सदन को बताया कि ग्रामथोक तेलियान के खसरा नंबर 2227 से जुड़ी भूमि पर राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर और तथ्यों को छिपाकर गलत तरीके से पट्टे जारी किए गए।

मामले की वस्तुस्थिति

यह भूमि 1971 में नगर सुधार न्यास (UIT) द्वारा अधिग्रहित की गई थी। मुआवजे पर सहमति न बनने के कारण यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में न्यास के नाम नहीं चढ़ सकी, लेकिन इसे नगर निगम को स्थानांतरित कर दिया गया। वर्तमान में यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है, फिर भी अधिकारियों ने तथ्यों को छिपाकर लीज जारी कर दी।

चार अधिकारियों पर गिरेगी गाज

मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने सदन में स्पष्ट किया कि फर्जी लीज जारी करने और बाद में उसे निरस्त करने के खेल में चार अधिकारी/कर्मचारी मुख्य रूप से जिम्मेदार पाए गए हैं:

  • डिप्टी कमिश्नर (विकास)
  • सीनियर ड्राफ्टर
  • जूनियर इंजीनियर (सिविल)
  • जूनियर असिस्टेंट

इन सभी को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी किया गया है और आज ही इनके खिलाफ निलंबन या अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए जाएंगे।

कलेक्टर और DLB निदेशक करेंगे जांच

सरकार ने इस मामले में दोहरी जांच के आदेश दिए हैं कि अजमेर कलेक्टर दो हफ्ते के भीतर एडीएम रैंक के अधिकारी से जांच करवाकर रिपोर्ट सौंपेंगे। पिछले 6 महीनों में नगर निगम द्वारा जारी किए गए सभी पट्टों की सघन जांच की जाएगी। स्वायत्त शासन विभाग (DLB) के निदेशक भी इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच करेंगे ताकि बड़े रसूखदारों की भूमिका स्पष्ट हो सके।

यूपी और पंजाब तक जुड़े तार

सदन में यह भी जानकारी दी गई कि लीज रजिस्ट्रेशन के मामले में तथ्यों की पुष्टि के लिए उत्तर प्रदेश और पंजाब सरकार को भी पत्र लिखा गया है। यह संकेत देता है कि इस घोटाले के तार अंतर्राज्यीय दस्तावेजों से जुड़े हो सकते हैं।

पढ़ें ये खबरें