Disturb Area Act: राजस्थान सरकार ने दंगा प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में धार्मिक आधार पर होने वाले प्रॉपर्टी लेन-देन को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने ‘डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट’ (Disturbed Areas Act) को मंजूरी दे दी है। यह विधेयक आगामी बजट सत्र में विधानसभा में पेश किया जाएगा। पारित होने और राज्यपाल की मंजूरी के बाद इसे अधिसूचित कर लागू किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य दंगों या सांप्रदायिक तनाव के दौरान किसी एक समुदाय के लोगों के जबरन पलायन, दबाव में की गई संपत्ति बिक्री और जनसांख्यिकीय असंतुलन को रोकना है।

क्या है डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट ?

नए कानून के तहत राज्य सरकार किसी भी दंगा प्रभावित, तनावग्रस्त या संवेदनशील क्षेत्र को ‘डिस्टर्ब्ड एरिया’ घोषित कर सकेगी। ऐसे घोषित क्षेत्रों में धार्मिक समुदायों के बीच प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री बिना जिला कलेक्टर की पूर्व अनुमति के नहीं हो सकेगी। यदि कोई व्यक्ति नियमों की अनदेखी कर प्रॉपर्टी का लेन-देन करता है, तो जिला कलेक्टर को उस सौदे को रद्द करने और संबंधित संपत्ति को सीज करने का अधिकार होगा।

कानून के प्रमुख प्रावधान

  • दंगा प्रभावित या संवेदनशील इलाकों को अधिसूचना के जरिए डिस्टर्ब्ड एरिया घोषित किया जाएगा।
  • ऐसे क्षेत्रों में धार्मिक समुदायों के बीच प्रॉपर्टी ट्रांसफर से पहले कलेक्टर की लिखित अनुमति जरूरी होगी।
  • कलेक्टर यह जांच करेगा कि सौदा स्वेच्छा से हो रहा है या किसी दबाव, डर या लालच के कारण।
  • नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सौदा निरस्त किया जा सकेगा और संपत्ति जब्त भी हो सकती है।
  • कानून में ‘हिंदू’ या ‘मुस्लिम’ शब्द का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं होगा, बल्कि इसे धार्मिक समुदायों के बीच प्रॉपर्टी ट्रांसफर के रूप में परिभाषित किया जाएगा।

गुजरात मॉडल पर आधारित कानून

यह कानून गुजरात में वर्षों से लागू ‘गुजरात डिस्टर्ब्ड एरियाज एक्ट’ की तर्ज पर तैयार किया गया है। इसके अलावा नगालैंड, असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी इसी तरह के प्रावधान मौजूद हैं। गुजरात के बाद अब राजस्थान इस तरह का कानून लागू करने वाला प्रमुख राज्य बनने जा रहा है।

क्यों महसूस हुई जरूरत

सरकार के अनुसार, कई संवेदनशील इलाकों में दंगों या तनाव के बाद एक समुदाय के लोगों को डर या दबाव में अपनी संपत्ति बेचने के लिए मजबूर किया गया। इससे इलाके का सामाजिक संतुलन बिगड़ा और भविष्य में और तनाव की आशंका बढ़ी। नए कानून के जरिए ऐसी परिस्थितियों पर रोक लगाई जाएगी।

विपक्ष ने उठाए सवाल

वहीं विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने इस कानून को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यह संपत्ति के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है। साथ ही आशंका जताई जा रही है कि इससे धार्मिक आधार पर भेदभाव को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि कानून का उद्देश्य केवल शांति बनाए रखना है, न कि किसी समुदाय को निशाना बनाना।

राजस्थान के संभावित डिस्टर्ब्ड एरिया

विशेषज्ञों के मुताबिक, कानून लागू होने के बाद राजस्थान के कई शहरों और कस्बों में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। इनमें—

अजमेर: दरगाह क्षेत्र और पुराने शहर के आसपास के इलाके

उदयपुर: हाल के वर्षों में तनाव की घटनाएं

भरतपुर: पूर्व में दंगों का इतिहास

करौली: मॉब वायलेंस और साम्प्रदायिक घटनाएं

टोंक: छोटे स्तर पर तनाव की घटनाएं

अलवर, सीकर, झुंझुनू, जयपुर (चौमूं क्षेत्र): कुछ रिपोर्ट्स में सामाजिक टकराव के मामले

आगे क्या ?

बजट सत्र में बिल के पारित होने के बाद इसे राज्यपाल की मंजूरी मिलेगी। इसके बाद सरकार संवेदनशील क्षेत्रों की सूची अधिसूचित करेगी और कानून को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। प्रशासनिक स्तर पर जिला कलेक्टरों को इसकी निगरानी की अहम जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। यह कानून राजस्थान में शांति व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में अहम साबित हो सकता है, हालांकि इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर सभी की नजर रहेगी।

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