Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस स्कीम से जुड़े मामले में कहा है कि पति को यह कहते हुए छात्रवृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता कि विवाह से पहले उसकी पत्नी को स्कॉलरशिप दी जा चुकी है।
अदालत ने कहा कि विवाह से पहले युवती अपने पिता के परिवार की सदस्य होती है और शादी के बाद वह पति के परिवार का हिस्सा बनती है। इसलिए पूर्व में युवती को मिली छात्रवृत्ति के आधार पर पति को इससे वंचित नहीं किया जा सकता।

जस्टिस अनुरूप सिंधी की एकलपीठ ने यह आदेश देवेन्द्र कुमार कोठारी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता अभिनव शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता का बेटा प्रखर कोठारी अमेरिका की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के एमबीए आई प्रोग्राम में अध्ययनरत है। उसने राज्य सरकार की स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप के लिए आवेदन किया था, लेकिन गत 19 दिसंबर को उसका आवेदन खारिज कर दिया।
जब इसका कारण पूछा गया तो प्रशासन ने मौखिक रूप से बताया कि इसी योजना के तहत उसकी पत्नी को तीन साल पहले छात्रवृत्ति मिल चुकी है। नियमानुसार ई-3 श्रेणी में एक परिवार से केवल एक सदस्य को ही स्कॉलरशिप दी जा सकती है। ऐसे में उसे इस स्कॉलरशिप से वंचित किया जा रहा है।
याचिका में कहा गया कि उसकी पत्नी को विवाह से पहले स्कॉलरशिप मिली थी और उस समय वह उसके परिवार का हिस्सा ना होकर अपने पिता के परिवार का हिस्सा थी। दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि योजना में ई-श्रेणी में एक परिवार से एक सदस्य की लाभान्वित हो सकता है। याचिकाकर्ता की पत्नी को पूर्व में इसका लाभ दिया जा चुका है। ऐसे में पति को योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता।
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