Rajasthan News: मुख्य सचिव सुधांश पंत ने गुरुवार को जिला स्तरीय जनसुनवाई के दौरान खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों के कलेक्टरों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जनसुनवाई में जुड़कर कलेक्टरों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की और उनकी लापरवाही पर नाराजगी जाहिर की।

जनसुनवाई सिर्फ औपचारिकता बन गई है- मुख्य सचिव
मुख्य सचिव ने कहा कि जिला कलेक्टर जनसुनवाई में सिर्फ शामिल होकर चले जाते हैं, लेकिन शिकायतों के निस्तारण को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शिकायतों के समाधान में पारदर्शिता और संवेदनशीलता नहीं रखी गई, तो जनसुनवाई की पूरी प्रक्रिया ही निरर्थक हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि 30% से भी कम संतुष्टि दर (सैटिस्फैक्शन रेट) यह दर्शाती है कि कलेक्टर जनसुनवाई को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और यह केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है।
चित्तौड़गढ़ ने किया बेहतर प्रदर्शन
मुख्य सचिव ने बताया कि चित्तौड़गढ़ एकमात्र जिला है जहां संतुष्टि दर 50% से अधिक रही, जबकि आदिवासी जिलों की परफॉर्मेंस भी संतोषजनक रही है। उन्होंने अन्य जिलों को भी इसी तरह सुधार लाने के निर्देश दिए।
शॉर्टकट अपनाने से घट रहा जनसंतोष
मुख्य सचिव ने आरोप लगाया कि कई जिलों में अधिकारी शिकायतों को हल करने के बजाय संबंधित विभाग को सिर्फ पत्र भेजकर मामलों को दाखिल कर रहे हैं, जिससे फरियादियों को वास्तविक राहत नहीं मिल पा रही। उन्होंने जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और अजमेर जैसे बड़े जिलों की खराब परफॉर्मेंस पर विशेष नाराजगी जताई।
बड़े जिले होने का बहाना नहीं चलेगा
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि बड़े जिलों के अधिकारी जनसुनवाई में शिकायतों की अधिक संख्या का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उन्होंने दो टूक कहा, “बड़े जिले हैं, तो क्या हुआ? जब जिम्मेदारी दी गई है, तो उसे निभाना भी पड़ेगा।”
जयपुर कलेक्टर से मांगा जवाब
मुख्य सचिव ने जयपुर कलेक्टर जितेंद्र कुमार सोनी से सीधे जवाब तलब करते हुए पूछा कि “आपका प्रदर्शन खराब क्यों है?”
इस पर जयपुर कलेक्टर ने सफाई देते हुए कहा कि अधिकतर मामलों का समाधान ग्राम और उपखंड स्तर पर कर दिया जाता है, लेकिन कुछ विवादित एवं न्यायालय में विचाराधीन प्रकरणों के चलते संतुष्टि दर कम रह जाती है।
अन्य कलेक्टरों से भी मांगा स्पष्टीकरण
सुधांश पंत ने अन्य जिलों के कलेक्टरों से भी खराब प्रदर्शन को लेकर जवाब मांगा। अधिकतर कलेक्टरों ने कहा कि विवादास्पद या न्यायालय में लंबित मामलों के कारण ही संतुष्टि दर प्रभावित हो रही है। हालांकि, मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि केवल सफाई देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि संतुष्टि दर में वास्तविक सुधार दिखना चाहिए।
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