Rajasthan News: राजस्थान के श्रीगंगानगर जिलें में साइबर ठगों ने एक डॉक्टर को अपना निशाना बनाया है। ठगों ने डॉक्टर को गिरफ्तारी और डिजिटल अरेस्ट का ऐसा खौफ दिखाया कि उन्होंने डर के मारे 17 लाख रुपये ठगों के बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए।

घटना 18 मार्च की है, जब डॉक्टर के पास एक अनजान व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का सब-इंस्पेक्टर बताया। ठग ने डॉक्टर को डराते हुए कहा, आपके नाम पर एक फर्जी सिम जारी हुई है, जिसका इस्तेमाल देशद्रोही गतिविधियों में हो रहा है। आपके बैंक खाते में ठगी का पैसा जमा है और पुलिस आपको कभी भी गिरफ्तार कर सकती है।
नकली FIR और डिजिटल अरेस्ट का जाल
डॉक्टर को पूरी तरह जाल में फंसाने के लिए डॉक्टर के व्हाट्सएप पर एक फर्जी FIR की कॉपी भेजी गई ताकि डॉक्टर को यकीन हो जाए कि मामला असली है। जिसके बाद ठगों ने लगातार कॉल करके डॉक्टर पर मानसिक दबाव बनाया। बातें करते हुए ठगों ने डॉक्टर से आधार कार्ड की फोटो भी मंगवा ली।
17 लाख का आरटीजीएस और फिर खुलासा
गिरफ्तारी से बचने और सरकारी जांच के नाम पर ठगों ने डॉक्टर को पैसे जमा करने को कहा। डर के मारे डॉक्टर ने 19 मार्च को 17 लाख रुपये आरटीजीएस (RTGS) के जरिए ठगों के खाते में भेज दिए। जब ठगों ने दोबारा पैसों की मांग की, तब डॉक्टर को शक हुआ। उन्होंने तुरंत साइबर थाने और एसओजी को इसकी जानकारी दी। 22 मार्च को इस मामले में जीरो नंबर एफआईआर दर्ज की गई है। फिलहाल साइबर थाना पुलिस आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर ठगों के डिजिटल फुटप्रिंट्स खंगाल रही है।
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