Rajasthan News: राजस्थान की पहचान और मरुस्थल के कल्पवृक्ष कहे जाने वाले खेजड़ी समेत अन्य हरे पेड़ों को बचाने के लिए अब राज्य सरकार ने आर-पार की जंग छेड़ दी है। प्रदेश में पेड़ों की अवैध कटाई रोकने के लिए एक ऐसा कानून तैयार किया जा रहा है, जिससे लकड़ी माफियाओं के पसीने छूट जाएंगे। दरअसल, इस कानून को लेकर सचिवालय में एक बहुत ही अहम बैठक हुई है, जिसमें सजा और जुर्माने के प्रावधानों को पहले से कहीं ज्यादा सख्त रखने पर मुहर लगी है।

बता दें कि इस नए विधेयक को लेकर संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल की अध्यक्षता में तीसरी बड़ी बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में राजस्व मंत्री हेमंत मीणा के साथ विधि, राजस्व और वन विभाग के आला अधिकारी भी मौजूद रहे। सूत्रों की मानें तो बैठक में नए कानून का जो ड्राफ्ट पेश किया गया है, उसमें पेड़ काटने की जांच प्रक्रिया से लेकर अपील और दंड तक के नियमों को इतना सख्त बनाया गया है कि कोई भी आसानी से बच नहीं पाएगा।

संरक्षित पेड़ों की बनेगी स्पेशल लिस्ट

गौरतलब है कि सरकार केवल कानून नहीं बना रही, बल्कि संवेदनशील और खास प्रजाति के पेड़ों की एक संरक्षित सूची भी तैयार कर रही है। इसमें खेजड़ी जैसे महत्वपूर्ण पेड़ों को अतिरिक्त सुरक्षा दी जाएगी। दरअसल, राजस्थान के कई जिलों में पिछले कुछ समय से सौर ऊर्जा प्लांट और सड़कों के नाम पर धड़ल्ले से हो रही कटाई की शिकायतें बढ़ी थीं, जिसके बाद सरकार को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है।

नए कानून में क्या होगा खास?

हरे पेड़ों की कटाई पर अब पूरी तरह पाबंदी के लिए कड़े प्रावधान होंगे। इसके तहत अगर कोई नियम तोड़ता है, तो उसके खिलाफ त्वरित न्यायिक व्यवस्था और भारी जुर्माने का रास्ता साफ किया गया है। मंत्री जोगाराम पटेल के अनुसार कानून ऐसा होगा जिससे पर्यावरण तो बचे, लेकिन आम किसान या नागरिक को बिना वजह दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

इस नए कानून का सबसे बड़ा असर पश्चिमी राजस्थान पर ज्यादा पड़ेगा। जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर में खेजड़ी को पूजनीय माना जाता है, इसकी सुरक्षा से न केवल हरियाली बढ़ेगी बल्कि वन्यजीवों चिंकारा और काले हिरण की भी रक्षा हो सकेगी।

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