Rajasthan News: खाड़ी देशों में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव और ईरान-इजराइल के बीच जारी रस्साकशी के बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने केंद्र सरकार की नीतियों और चुप्पी पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए पायलट ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश से जरूरी तथ्य छिपा रही है, जिससे आने वाले समय में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।

आम आदमी और कारोबार पर दोहरी मार
पायलट ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में युद्ध जैसे हालात का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि एक तरफ गैस सिलेंडरों के दाम बढ़ा दिए गए हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित नहीं की जा रही है। इसका सीधा असर न केवल आम गृहिणियों की रसोई पर पड़ रहा है, बल्कि होटल और रेस्टोरेंट कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। उन्होंने कहा, देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सरकार को समय रहते ठोस कदम उठाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार ने पूर्व में कोई तैयारी नहीं की।
संसद में चर्चा से क्यों भाग रही है सरकार?
सचिन पायलट ने संसद में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा न होने को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में लाखों भारतीय कार्यरत हैं। उनकी सुरक्षा को लेकर सरकार की क्या योजना है, यह स्पष्ट होना चाहिए। ईरान से जुड़े हालातों पर सरकार का बयान महज औपचारिकता नहीं होना चाहिए। शांति बहाली के लिए भारत को सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभानी चाहिए। पायलट ने आरोप लगाया कि चर्चा से बचकर सरकार यह संदेश दे रही है कि वह कुछ छिपाना चाहती है। विपक्ष और देश की जनता जानना चाहती है कि संभावित ऊर्जा संकट से निपटने का रोडमैप क्या है।
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