Rajasthan News: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की भजनलाल सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए पूर्व नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल और तत्कालीन प्रमुख सचिव जीएस संधू से जुड़े ₹237 करोड़ के सरकारी विज्ञापन घोटाले मामले में नोटिस जारी किया है। यह मामला पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के कार्यकाल का है, जिसमें बिना टेंडर प्रक्रिया के फर्जी विज्ञापन बिलों के ज़रिए भारी धनराशि के गबन का आरोप है।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने मामले को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। सरकार की ओर से AAG शिव मंगल शर्मा, अधिवक्ता निधि जसवाल और वरिष्ठ ASG एसवी राजू ने कोर्ट में दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि यह याचिका जनता के धन के दुरुपयोग के ठोस प्रमाणों के आधार पर दाखिल की गई है।
2014 में दर्ज चार एफआईआर में आरोप है कि क्रेयॉन्स एडवर्टाइजिंग लिमिटेड ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी बिलों के माध्यम से करोड़ों रुपए निकाल लिए। जांच में यह भी सामने आया कि 2008 से 2013 के बीच लगभग 90% विज्ञापन कार्य इसी एजेंसी को सौंपा गया, जो खरीद नियमों का उल्लंघन था। इससे राज्य को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ।
2017 में ACB ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन 2019 में एक क्लोज़र रिपोर्ट के जरिए कुछ सार्वजनिक अधिकारियों को जांच से बाहर कर दिया गया। इसके बाद 2021 में गहलोत सरकार ने अभियोजन खत्म करने की कोशिश की, जिसे विशेष अदालत ने खारिज कर दिया।
सरकार बदलने के बाद 2024 में बीजेपी सरकार ने इस फैसले के खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिकाएं वापस लेने की कोशिश की, लेकिन हाईकोर्ट ने इन्हें खारिज करते हुए राज्य सरकार पर प्रति याचिका ₹1 लाख का जुर्माना लगाया।
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