SIR Controversy: राजस्थान में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की सलाह पर टिप्पणी करने के बजाय अपनी पार्टी के नेताओं के आचरण पर भी बोलना चाहिए। वहीं, भाजपा एसटी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मन्नालाल रावत ने SIR का बचाव करते हुए इसे विश्वसनीय मतदाता सूची के लिए जरूरी प्रक्रिया बताया।

निर्वाचन आयुक्त से मुलाकात पर कांग्रेस को नसीहत
मदन राठौड़ ने कहा कि निर्वाचन आयुक्त से मिलने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया है। किसी शिकायत को लेकर सैकड़ों लोगों के साथ पहुंचना और शक्ति प्रदर्शन करना उचित तरीका नहीं है। उनके मुताबिक, कांग्रेस नेताओं को समय लेकर सीमित प्रतिनिधिमंडल के साथ निर्वाचन आयुक्त के सामने अपने तथ्य और तर्क रखने चाहिए।
राठौड़ ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी कांग्रेस को यही सलाह दी थी। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस कभी 240 तो कभी 400 लोगों के साथ आयोग से मिलने की बात करती है। राठौड़ के अनुसार, शिकायतों के समाधान के लिए संस्थागत प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
गहलोत से पूछा- कांग्रेस नेताओं के आचरण पर क्यों नहीं बोलते?
SIR और निर्वाचन आयोग के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए राठौड़ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आचरण का भी जिक्र किया। उन्होंने गहलोत से सवाल किया कि वे उन आरोपों पर क्यों नहीं बोलते, जिन्हें भाजपा महिला पुलिसकर्मी के प्रति अभद्र व्यवहार बता रही है।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने सार्वजनिक पदों पर बैठे नेताओं से मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा के अनुरूप आचरण होना चाहिए।
जेएनयू प्रकरण का भी किया उल्लेख
राठौड़ ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए कांग्रेस सांसद और प्रोफेसर डॉ. अंगोमचा बिमोल अकॉइजाम पर छात्राओं से संबंधित गंभीर आरोपों को लेकर भी कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि छात्राओं की सुरक्षा और सम्मान के मुद्दे पर राजनीतिक दलों को स्पष्ट रुख रखना चाहिए।
ये मुद्दे राठौड़ की ओर से लगाए गए आरोपों और राजनीतिक टिप्पणियों के संदर्भ में हैं। संबंधित मामलों में आरोपों की पुष्टि और जिम्मेदारी तय करने का आधार जांच तथा कानूनी प्रक्रिया होगी।
मन्नालाल रावत बोले- विश्वसनीय मतदाता सूची लोकतंत्र की जरूरत
भाजपा एसटी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मन्नालाल रावत ने SIR का बचाव करते हुए कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण कोई नई व्यवस्था नहीं है। अलग-अलग समय पर मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने की प्रक्रिया अपनाई जाती रही है। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू के शासनकाल में भी ऐसी प्रक्रिया होने का उल्लेख किया।
रावत ने कहा कि निर्वाचन आयोग संवैधानिक संस्था के रूप में यह काम कर रहा है। उनके मुताबिक, निष्पक्ष चुनाव के लिए भरोसेमंद मतदाता सूची जरूरी है। उन्होंने कांग्रेस की आपत्तियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि SIR को राजनीतिक अविश्वास के नजरिये से देखने के बजाय प्रक्रिया के तथ्यों पर चर्चा होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
रावत ने केरल में SIR के बाद कांग्रेस की सरकार बनने का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया को किसी एक राजनीतिक दल के खिलाफ कार्रवाई के रूप में पेश करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR को वैध माना है।
SIR को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों और भाजपा के बचाव के बीच मतदाता सूची का पुनरीक्षण अब राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन गया है। भाजपा इसे निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी प्रक्रिया बता रही है, जबकि कांग्रेस निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है।
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