बूंदी। बुधवार सुबह दिल्ली-मुंबई रेल लाइन पर गुडला रेलवे स्टेशन के पास अचानक इमरजेंसी हूटर बजा। कुछ ही देर में रेलवे, पुलिस और प्रशासनिक महकमे में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिली कि गुडला जंक्शन के पास मालगाड़ी और पैसेंजर ट्रेन की भीषण टक्कर हो गई है। हादसे में कई यात्री घायल होकर कोच में फंसे हैं और कुछ डिब्बे एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए हैं।

सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारियों के साथ पुलिस, प्रशासन और चिकित्सा विभाग की टीमें मौके के लिए रवाना हो गईं। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सिविल डिफेंस और बचाव दलों को भी सक्रिय कर दिया गया। घटनास्थल पर पहुंचते ही टीमों ने क्षतिग्रस्त कोचों से यात्रियों को निकालने और घायलों को प्राथमिक उपचार देने का ऑपरेशन शुरू किया।

लेकिन कुछ देर बाद पूरा मामला साफ हुआ। दरअसल गुडला में कोई वास्तविक ट्रेन हादसा नहीं हुआ था। यह रेलवे की ओर से आयोजित मॉकड्रिल थी, जिसमें वास्तविक दुर्घटना जैसी स्थिति बनाकर आपदा से निपटने की तैयारियों का परीक्षण किया गया।

सूचना मिलते ही एक्टिव हुआ पूरा बचाव तंत्र

आपदा प्रबंधन एवं बाढ़ नियंत्रण केंद्र के प्रभारी सत्यवान शर्मा ने बताया कि सुबह गुडला रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन दुर्घटना की सूचना मिली थी। जिला कलेक्टर के निर्देश पर राहत और बचाव से जुड़े सभी दलों को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

केशोरायपाटन ब्लॉक के अधिकारी, तालेड़ा और बूंदी के बचाव दल, पुलिस, चिकित्सा विभाग, एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं और तय प्रक्रिया के अनुसार रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

कोच में फंसे यात्रियों को निकालने का अभ्यास

मॉकड्रिल के तहत ट्रेन दुर्घटना के बाद कई यात्रियों के डिब्बों में फंसे होने का परिदृश्य तैयार किया गया था। बचाव दलों ने कोचों का निरीक्षण कर फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया पूरी की।

गंभीर रूप से घायल यात्रियों को प्राथमिक उपचार देने और जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था भी अभ्यास का हिस्सा रही। इस दौरान बचाव दलों की त्वरित कार्रवाई और मौके पर उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल परखा गया।

असली हादसा होता तो कितनी जल्दी पहुंचती मदद, इसी की परीक्षा

मॉकड्रिल का मकसद केवल रेस्क्यू ऑपरेशन का प्रदर्शन करना नहीं था। इसके जरिए यह जांचा गया कि वास्तविक रेल दुर्घटना की स्थिति में रेलवे, पुलिस, प्रशासन, चिकित्सा विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसियां कितनी तेजी से एक साथ काम कर सकती हैं।

हादसे की सूचना मिलने से लेकर टीमों के घटनास्थल तक पहुंचने, घायलों को निकालने, प्राथमिक उपचार देने और अस्पताल तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास किया गया।

साल में एक बार होती है ऐसी मॉकड्रिल

कोटा रेल मंडल के अधिकारियों के अनुसार रेलवे की ओर से इस तरह की मॉकड्रिल साल में एक बार आयोजित की जाती है। इसका उद्देश्य संभावित रेल दुर्घटना के दौरान विभागों की तैयारियों को परखना और किसी भी कमी की पहचान करना है।

मॉकड्रिल में खास तौर पर यह देखा जाता है कि सूचना मिलने के बाद बचाव दल कितनी जल्दी मौके पर पहुंचते हैं, राहत एवं बचाव कार्य किस तरह शुरू होता है और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय किस स्तर तक प्रभावी रहता है।