रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 7 नवंबर को पश्चिम बंगाल के सुकना में त्रिशक्ति कोर की सैन्य तैयारियों और ऑपरेशनल क्षमताओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्हें वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास चल रहे बुनियादी ढांचे के विकास, आधुनिक हथियारों की तैनाती और नई सैन्य तकनीकों के इस्तेमाल की जानकारी दी गई। उन्होंने सेना की तैयारियों पर संतोष जताते हुए भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी रूप से मजबूत होने पर जोर दिया।

LAC पर सैन्य तैयारियों और इंफ्रास्ट्रक्चर की समीक्षा
राजनाथ सिंह ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों, सुरंगों और अन्य सैन्य बुनियादी ढांचे के विकास की सराहना की। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में स्थानीय लोगों के कल्याण के लिए सेना के प्रयास राष्ट्र निर्माण और नागरिक-सैन्य संबंधों को मजबूत कर रहे हैं। इस दौरान थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और पूर्वी कमान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।
ड्रोन, साइबर अटैक और हाइब्रिड वॉरफेयर पर चेताया
रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक युद्ध अब केवल गोलीबारी और पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं है। ड्रोन घुसपैठ, साइबर हमले, प्रॉक्सी वॉर और सूचना युद्ध जैसी चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि दुश्मन सोशल मीडिया के जरिए दुष्प्रचार फैलाने और ड्रोन से संवेदनशील सैन्य ठिकानों की निगरानी करने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में भारतीय सेना को हर मोर्चे पर सतर्क रहना होगा।
राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भर भारत के तहत रक्षा क्षेत्र में हो रहे विकास का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारतीय स्टार्टअप और उद्योग अब ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम और आधुनिक सैन्य उपकरण तैयार कर रहे हैं।

सुकना को बताया पूर्वी भारत की सुरक्षा की अहम कड़ी
राजनाथ सिंह ने सुकना को पूर्वी भारत की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि यहां से अग्रिम मोर्चों तक हथियार, रसद, भोजन, चिकित्सा सुविधाएं और सैनिकों की आवाजाही सुनिश्चित की जाती है। इसलिए मजबूत सप्लाई चेन और चौबीसों घंटे ऑपरेशनल तैयारी बेहद जरूरी है।
सैनिकों के साथ बाराखाना में मनाई दिवाली
दिवाली की पूर्व संध्या पर रक्षा मंत्री ने जवानों के साथ बाराखाना में हिस्सा लिया और उनके साहस, समर्पण तथा कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की। उन्होंने सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण को भी प्राथमिकता देने की बात कही।
उन्होंने पूर्वोत्तर भारत को देश का ‘आखिरी छोर’ नहीं, बल्कि ‘पहला छोर’ बताते हुए इसकी सांस्कृतिक और रणनीतिक महत्ता पर जोर दिया। साथ ही सैनिकों और उनके परिवारों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं।

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