भुवनेश्वर: ओडिशा में राज्यसभा चुनावों के दौरान एक विवाद खड़ा हो गया, जब ब्रह्मगिरि की विधायक उपासना मोहपात्र ने ओवरराइटिंग (लिखावट पर दोबारा लिखने) के कारण दूसरा बैलेट पेपर मांगा, जिससे विपक्षी दलों के एजेंटों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.

यह विवाद तब शुरू हुआ जब उपासना ने अपने पहले बैलेट पेपर में गलती होने के बाद दूसरे बैलेट पेपर की मांग की. बीजद और कांग्रेस के एजेंटों ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए दावा किया कि इस कदम से चुनाव नियमों का उल्लंघन हुआ है. मतदान को कुछ समय के लिए रोक दिया गया था, और इस मुद्दे के सुलझने के बाद मतदान फिर से शुरू हुआ.

विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने आरोप लगाया कि उपासना ने मतदान के दौरान एक गंभीर गलती की है, और उन्होंने अधिकारियों पर दूसरा बैलेट पेपर जारी करके कानून तोड़ने का आरोप लगाया. उन्होंने तर्क दिया कि उपासना के वोट को स्वीकार करना लोकतांत्रिक मानदंडों और चुनाव कानून का उल्लंघन करने जैसा है.

नवीन के आरोपों का जवाब देते हुए, विधायक सरोज पाढ़ी ने पलटवार किया और कहा कि दूसरा बैलेट पेपर जारी करना गैर-कानूनी नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नवीन को कानून की समझ है, और यह स्पष्ट किया कि उपासना ने दूसरा बैलेट पेपर मांगने से पहले अपना पहला बैलेट पेपर एजेंटों को नहीं दिखाया था. पाढ़ी ने जोर देकर कहा कि कोई भी गैर-कानूनी काम नहीं हुआ है.

बीजेपी विधायक प्रकाश सेठी ने भी उपासना का बचाव करते हुए कहा कि चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, यदि पहले बैलेट पेपर में कोई गलती (ओवरराइटिंग) हो और उसे एजेंटों को न दिखाया गया हो, तो दूसरा बैलेट पेपर जारी किया जा सकता है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मतदान अधिकारी ने नियमों के दायरे में रहकर ही काम किया है.

इस घटना ने राज्यसभा चुनाव के माहौल को एक रणक्षेत्र में बदल दिया, जहाँ विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला. जहाँ एक ओर विपक्षी नेताओं ने बीजेपी पर चुनाव प्रक्रिया में हेरफेर करने का आरोप लगाया, वहीं दूसरी ओर बीजेपी सदस्यों ने यह दावा किया कि अपनाई गई पूरी प्रक्रिया कानूनी मानदंडों के अनुरूप ही थी.