इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सीतापुर में दर्ज दुष्कर्म मामले में कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को डिस्चार्ज कर दिया है. न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने अभियोजन सामग्री में शिकायतकर्ता और राठौर के बीच लंबे समय से सहमति वाले संबंध के संकेत का उल्लेख किया.

लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीतापुर में दर्ज दुष्कर्म मामले में कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को डिस्चार्ज कर दिया है. न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने मामले में आदेश पारित करते हुए अभियोजन पक्ष की सामग्री पर विचार किया और शिकायतकर्ता तथा राठौर के बीच लंबे समय से सहमति वाले संबंध के संकेत का उल्लेख किया.

अदालत के मुताबिक, राठौर पर आरोप था कि उन्होंने शादी का वादा करके शिकायतकर्ता के साथ शारीरिक संबंध बनाए. न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने कहा कि उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया कथित अपराध के घटित होने को लेकर मजबूत संदेह पैदा नहीं करती.

शिकायतकर्ता का पक्ष

अदालत के समक्ष शिकायतकर्ता के बयान का भी उल्लेख हुआ. उसके अनुसार, वह एक जनसभा के दौरान राकेश राठौर के संपर्क में आई थी, जिसके बाद उन्होंने उसे राजनीतिक संरक्षण देने की पेशकश की.

शिकायतकर्ता ने यह पेशकश स्वीकार की और इसके बाद दोनों के बीच नजदीकी बढ़ी. इसी दौरान उसे एक संगठन में जिला महिला अध्यक्ष बनाए जाने की बात भी अदालत के समक्ष रखी गई.

पति के बयान का जिक्र

हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता के पति के बयान पर भी गौर किया. उसके अनुसार, राकेश राठौर उसकी पत्नी को अक्सर अपने घर बुलाते थे और कई बार वह देर रात तक वहां रहती थी.

अदालत ने उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए अभियोजन सामग्री में दो वयस्क और विवाहित लोगों के बीच लंबे समय से सहमति वाले विवाहेतर संबंध के संकेत का उल्लेख किया.

पुराने आदेश पर भी असर

उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सीतापुर में मामले की शुरुआत जनवरी 2025 में दर्ज शिकायत और प्राथमिकी से हुई थी. जिला अदालत ने राठौर की आरोप से डिस्चार्ज किए जाने की मांग वाली अर्जी खारिज कर उनके खिलाफ आरोप तय किए थे.

इसके बाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. हाईकोर्ट ने जिला अदालत के 5 मई 2025 के आदेश को रद्द करते हुए राकेश राठौर को मामले से डिस्चार्ज कर दिया.