चंडीगढ़ : हजारों साल पुरानी हड़प्पा सभ्यता की निशानियों को अपने भीतर समेटे हरियाणा के राखीगढ़ी की पहचान अब देश-विदेश में और मजबूत करने की तैयारी है। प्रदेश सरकार इस ऐतिहासिक स्थल को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर पर्यटन और पुरातात्विक शोध के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके तहत राखीगढ़ी में आधुनिक म्यूजियम कॉम्प्लेक्स का काम जल्द पूरा किया जाएगा। परियोजना के शेष कार्यों के लिए 180 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है।

हरियाणा के सहकारिता, पुरातत्व, पर्यटन एवं संग्रहालय मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने राखीगढ़ी महोत्सव के दौरान आयोजित अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य इस प्राचीन धरोहर को संरक्षित करने के साथ इसकी ऐतिहासिक महत्ता को आधुनिक तरीके से दुनिया के सामने लाना है।

म्यूजियम में करीब से समझ सकेंगे हड़प्पा सभ्यता

राखीगढ़ी में विकसित होने वाला आधुनिक म्यूजियम कॉम्प्लेक्स यहां की प्राचीन सभ्यता को समझने का नया माध्यम बनेगा। यहां मिलने वाले पुरातात्विक अवशेषों और ऐतिहासिक साक्ष्यों को व्यवस्थित ढंग से प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे लोगों को हजारों साल पहले के समाज की जीवनशैली के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।

म्यूजियम में हड़प्पा कालीन लोगों के रहन-सहन, मकानों की बनावट, कृषि व्यवस्था, शिल्पकला और नगर नियोजन से जुड़ी जानकारियों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जा सकेगा। इससे विद्यार्थियों, इतिहासकारों, शोधार्थियों और पर्यटकों को प्राचीन सभ्यता को करीब से समझने में मदद मिलेगी।

ऑडिटोरियम भी बनेगा, बढ़ेंगी सांस्कृतिक गतिविधियां

इस परियोजना में आधुनिक म्यूजियम के साथ ऑडिटोरियम का निर्माण भी शामिल है। इसके माध्यम से ऐतिहासिक विषयों पर चर्चा, शैक्षणिक सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा के अनुसार, राखीगढ़ी केवल एक पुरातात्विक स्थल नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन वैज्ञानिक सोच, विकसित नगर व्यवस्था और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण प्रमाण है। यहां हुई खुदाई से मिले साक्ष्य प्राचीन समाज की संरचना और जीवनशैली को समझने में अहम भूमिका निभाते हैं।

पर्यटकों के लिए विश्राम गृह का काम पूरा

राखीगढ़ी आने वाले पर्यटकों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विश्राम गृह का निर्माण कार्य भी पूरा किया जा चुका है। म्यूजियम कॉम्प्लेक्स और अन्य सुविधाओं के विकसित होने से यहां आने वाले लोगों को बेहतर अनुभव मिलने की उम्मीद है।

सरकार का प्रयास है कि ऐतिहासिक महत्व रखने वाले इस स्थल को ऐसी सुविधाओं से जोड़ा जाए, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी पर्यटक यहां पहुंचें। इससे राखीगढ़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद मिल सकती है।

पर्यटन बढ़ा तो स्थानीय लोगों को भी मिलेगा फायदा

राखीगढ़ी में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने का लाभ आसपास के गांवों के लोगों को भी मिल सकता है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार, स्वरोजगार, हस्तशिल्प और अन्य छोटे व्यवसायों के अवसर पैदा होने की संभावना है।

इसके अलावा, म्यूजियम और ऑडिटोरियम के माध्यम से राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। इससे राखीगढ़ी को इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।

प्राचीन विरासत को नई पहचान दिलाने पर जोर

डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण केवल पुरानी इमारतों और अवशेषों को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को अपनी सभ्यता और संस्कृति से परिचित कराने का भी माध्यम है।

अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में सीडीएलयू के कुलपति प्रो. विजय कुमार, पद्मश्री डॉ. आरएस बिष्ट, उपनिदेशक डॉ. नरेंद्र परमार, डॉ. अमरेंद्र नाथ और डॉ. गरिमा सिंह सहित अन्य पुरातात्विक विशेषज्ञों ने हड़प्पा कालीन संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी साझा की।

अब 180 करोड़ रुपये की मंजूरी के साथ राखीगढ़ी के विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। म्यूजियम कॉम्प्लेक्स का काम पूरा होने के बाद यह ऐतिहासिक स्थल अपनी प्राचीन विरासत को आधुनिक तरीके से प्रस्तुत करने के साथ हरियाणा के पर्यटन मानचित्र पर भी महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर सकता है।