Dharm Desk : हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। सालभर में आने वाली 24 एकादशियों में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी दीपावली से ठीक पहले आती है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से रमा एकादशी का व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। परिवार में खुशहाली बनी रहती है।

इस बार रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर गुरुवार को रखा जाएगा। धार्मिक दृष्टि से यह व्रत पापों से मुक्ति, धन-धान्य की वृद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।रमा एकादशी का महत्व राजा मुचुकुंद की पुत्री चंद्रभागा और उनके पति शोभन की कथा भी जुड़ा है। प्राचीन कथा के अनुसार शोभन ने रमा एकादशी का व्रत किया था। इस व्रत के पुण्य प्रभाव से उन्हें विशेष फल प्राप्त हुआ।

रमा एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार रमा एकादशी पर पूजा-पाठ और भगवान विष्णु की आराधना के लिए दिनभर का समय शुभ रहेगा। श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेकर पूजा कर सकते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:00 से 5:48 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:26 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:33 से 5:59 बजे तक

रमा एकादशी व्रत का पारण कब होगा

एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि में खोला जाता है। इस साल रमा एकादशी व्रत का पारण 6 नवंबर शुक्रवार को किया जाएगा। पारण का शुभ समय सुबह 6.37 मिनट से 8.48 मिनट तक रहेगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को द्वादशी तिथि में निर्धारित समय के भीतर भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद पारण करना चाहिए।

रमा एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मी पूजा का महत्व

रमा माता लक्ष्मी का एक नाम है। उन्हें भगवान विष्णु की पत्नी और धन-संपत्ति की देवी माना जाता है।यह एकादशी दीपावली से ठीक पहले आती है इसलिए इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व बढ़ जाता है। भक्त भगवान विष्णु को तुलसी दल, फल, फूल और भोग अर्पित करते हैं। वहीं माता लक्ष्मी की पूजा कर घर में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

व्रत करने से मिलते हैं धार्मिक लाभ

1.रमा एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को पापों से मुक्ति मिलती है। इसे ब्रह्महत्या जैसे गंभीर पापों के प्रायश्चित का माध्यम भी बताया गया है।
2.इस व्रत से घर में सुख-शांति और धन-धान्य की वृद्धि होने की मान्यता है। श्रद्धापूर्वक व्रत करने वाले भक्त को मृत्यु के बाद भगवान विष्णु के धाम वैकुंठ की प्राप्ति होती है।