रायपुर। मरवाही वनमंडल के मरवाही रेंज अंतर्गत उसाड़ गांव क्षेत्र में दुर्लभ वन्यजीव हनी बैजर (रैटल) का जोड़ा देखे जाने से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है. ग्रामीणों द्वारा मोबाइल से लिए गए फोटो और वीडियो के माध्यम से इस दुर्लभ जीव की उपस्थिति की पुष्टि हुई है. भारत के सीमित क्षेत्रों में पाए जाने वाले हनी बैजर का मरवाही क्षेत्र में दिखाई देना यहां की समृद्ध जैव विविधता और सुदृढ़ होते पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है.
उल्लेखनीय है कि वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डे के नेतृत्व में प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण हेतु संचालित योजनाओं और सतत् प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं. इन्हीं प्रयासों के चलते दुर्लभ वन्यजीवों को सुरक्षित प्राकृतिक आवास उपलब्ध हो पा रहा है. राज्य शासन की प्राथमिकता वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण की है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित एवं समृद्ध पर्यावरण मिल सके.

दुर्लभ वन्यजीव हनी बैजर (रैटल) की उपस्थिति की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और सुरक्षात्मक कार्रवाई करते हुए हनी बैजर के जोड़े को सुरक्षित रूप से जंगल की ओर रवाना किया गया. इस दौरान किसी भी प्रकार की जनहानि या पशुहानि नहीं हुई. विभाग द्वारा संबंधित क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ कर दी गई है.
मरवाही वनमंडलाधिकारी ग्रीष्मी चांद ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे वन्यजीवों के पास न जाएं और न ही उन्हें परेशान करें. उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी वन्यजीव के दिखने पर तत्काल वन विभाग को सूचित करें.
गौरतलब है कि हनी बैजर, बड़े शिकारी जानवरों की तुलना में अपेक्षाकृत छोटा होने के बावजूद, हनी बैजर लड़ाई से पीछे नहीं हटता, यहाँ तक कि अपने से कई गुना बड़े जानवरों से भी. शेर, लकड़बग्घे और यहाँ तक कि ज़हरीले साँप भी हनी बैजर के दृढ़ रवैये और प्रभावशाली जीवन रक्षा कौशल के कारण उससे दूर भाग जाते हैं.
हनी बैजर भारत में बहुत ही सीमित क्षेत्रों में पाया जाता है, और इसे दुर्लभ प्रजातियों में गिना जाता है. यह अपनी असाधारण बहादुरी, आक्रामक स्वभाव और मजबूत त्वचा के लिए जाना जाता है. मधुमक्खियों के छत्तों से शहद निकालकर खाने की आदत के कारण इसे हनी बैजर कहा जाता है.
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