रायपुर। कृषि विभाग, किसान कल्याण एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग के दो सालों के कामों को लेकर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। विभाग के दो वर्षों की उपलब्धियों को गिनाते हुए मंत्री नेताम ने कहा कि सरकार किसानों के हित के लिए लगातार काम कर रही है और “विकसित भारत” की परिकल्पना को लेकर आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि बीते दो वर्षों में किसानों को सीधे उनके खातों में कुल 94 हजार 960 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है, जिससे प्रत्येक किसान को औसतन करीब 3 लाख रुपये का लाभ मिला।

मंत्री नेताम ने कहा कि सरकार ने पीपीटी के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध कराए गए। पहले खाद-बीज की उपलब्धता सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन अब व्यवस्था सुदृढ़ हुई है और इसका सकारात्मक असर कृषि उत्पादन पर भी पड़ा है।
उन्होंने बताया कि धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू होकर 31 जनवरी तक चलेगी। अब तक 18,644 करोड़ रुपये किसानों के खातों में जमा किए जा चुके हैं और 31 जनवरी तक शेष किसानों से भी धान खरीदी पूरी कर ली जाएगी। पिछले दो वर्षों में धान की रिकॉर्ड खरीदी दर्ज की गई है।
मंत्री ने दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, गौधाम योजना के तहत गौठानों की स्वीकृति, पशुओं के इलाज व देखभाल की व्यवस्था तथा पॉम ऑयल की खेती के प्रति बढ़ते रुझान की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसान अब दलहन, तिलहन और मसालों की खेती की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
इस अवसर पर कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव शहला निगार ने विभागीय उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मिट्टी की उर्वरता और जलवायु को ध्यान में रखते हुए कृषि योजनाएं तैयार की जा रही हैं। प्राकृतिक उर्वरकों को बढ़ावा दिया जा रहा है और एग्रिस्टेक पोर्टल के माध्यम से आबंटन किया जाएगा। रबी फसलों के क्षेत्र विस्तार के साथ दलहन-तिलहन को सरकार की प्राथमिकता में रखा गया है।
उन्होंने बताया कि 2047 विजन के तहत फसल उत्पादन में वैल्यू एडिशन पर फोकस किया जा रहा है और किसानों के एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन) को बढ़ावा दिया जाएगा। बीते दो वर्षों में कृषक उन्नति योजना के तहत 25 लाख किसानों को सहायता दी गई है।
धान किसानों को रिकॉर्ड 25,265 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जिसमें वर्ष 2023-24 में 13,289 करोड़ और 2024-25 में 11,976 करोड़ रुपये शामिल हैं। इसके अलावा 33 हजार गन्ना किसानों को 92.57 करोड़ रुपये का गन्ना बोनस दिया गया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से 1.89 लाख किसानों को 854 करोड़ रुपये का लाभ मिला है। खरीफ 2025 से धान के अलावा अन्य फसलों के किसानों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा।
एससी-एसटी और महिला किसानों को बीज प्रमाणीकरण शुल्क पर 100 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 23,050 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है। दो वर्षों में 21 लाख क्विंटल से अधिक प्रमाणित बीज वितरित किए गए हैं। साथ ही 2,200 से अधिक किसानों को ट्रैक्टर और 5,000 से ज्यादा किसानों को कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं।
प्रदेश में 22,000 हेक्टेयर में ड्रिप और स्प्रिंकलर से सूक्ष्म सिंचाई, 38,000 हेक्टेयर में जैविक खेती और 50,000 हेक्टेयर में जैविक प्रमाणीकरण जारी किया गया है। छत्तीसगढ़ में 36 गौ-धाम को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 11 गौ-धाम पहले से संचालित हैं। प्रत्येक गौ-धाम में 150 से 200 घुमंतू पशुओं का संरक्षण किया जा रहा है। आने वाले समय में पशु नस्ल सुधार पर विशेष फोकस रहेगा।
उन्होंने बताया कि ई-नाम पोर्टल में छत्तीसगढ़ मंडी बोर्ड को प्रथम पुरस्कार मिला है। मत्स्य बीज उत्पादन और मत्स्य पालन में छत्तीसगढ़ देश में छठे स्थान पर है, जबकि 2025 में झींगा सह मछली पालन की शुरुआत की जाएगी। सरकार के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ में कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में नई संभावनाएं साकार हो रही हैं और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।


