देहरादून. पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के 15 दिन के राजनीतिक अवकाश की चर्चा बहुत हो रही है. राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर ये भी चर्चा है कि ये अवकाश कहीं नाराजगी का परिणाम तो नहीं? इस बीच हरीश रावत ने स्थिति को साफ करते हुए एक पोस्ट साझा किया है.
रावत ने लिखा है कि ’59 वर्षों से अधिक के परिणय-सूत्र बंधन के इस लंबे दौर में निरंतर कर्तव्यरत रहने के दौरान एक छोटा अर्जित अवकाश लेना मेरा स्वाभाविक अधिकार बनता है. अटूट गठबंधन के दौरान कभी-कभी कुछ ऐसे क्षण आ सकते हैं, जब आप थोड़ी असहजता का अनुभव कर सकते हैं. बड़े परिप्रेक्ष्य में स्थितियों को समझना पड़ता है. मैं विनतीपूर्वक कहना चाहता हूँ कि मेरे इस अर्जित अवकाश को लेकर पक्ष-विपक्ष न बनाया जाए. गोविंद सिंह कुंजवाल से मेरा लंबा मानसिक, भावनात्मक संबंध है, उनके शब्द स्वाभाविक हैं. कुछ लोग तो होंगे जिन्होंने मुझे भ्रातृवत् या पितृवत माना होगा, उनकी भी कुछ भावनाएं हो सकती हैं, फिर भी मैं माफ़ी चाहूंगा. मुझे हमेशा 59 वर्षों की अथक यात्रा के दौरान इस बात का स्मरण रहा है कि मैं पार्टी का कार्यकर्ता हूं, अंतिम रूप से पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व का निर्णय ही मैंने हमेशा शिरोधार्य माना है. कभी थोड़ी विनती कर दी होगी, मगर अनंतोगत्वा शीर्ष के निर्णय को ही शिरोधार्य किया है. इतने लंबे व्रत, जो अब संकल्प का रूप ले चुका है, वह अब न टूटेगा और न बदलेगा.’
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रावत ने आगे लिखा कि ‘नौजवान, जिनको 2027 में अपने लिए संभावनाएं दिखाई दे रही हैं, मैं उनसे कहना चाहता हूं, महर्षि दधीचि की तरह यदि उन्हें मेरी हड्डियों की आवश्यकता भी होगी, तो हरीश रावत की हड्डियां भी उनके भविष्य को संवारने के लिए हमेशा उपलब्ध रहेंगी. अवकाश के दौरान भी मैं निरंतर सक्रिय हूं और निरंतर अपनी हड्डियां घिस रहा हूं. इस लंबे अंतराल के दौरान मेरा कई लोगों, समूहों, क्षेत्रों, मान्यताओं, जन अपेक्षाओं के साथ जुड़ाव रहा है. जीवन के इस मोड़ में मुझे उनके परामर्श की भी आवश्यकता है और उनसे अपने जुड़ाव को दोहराने के लिए उनके मध्य जाने की आवश्यकता को भी मैं महसूस करता हूं. मुझको लेकर उत्सुकता रखने वाले समीक्षकों का मैं आभारी हूं.’
क्यों अवकाश ले रहे हैं हरीश रावत?
दरअसल, रामनगर के युवा नेता संजय नेगी की कांग्रेस में संभावित ज्वाइनिंग को लेकर पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर खींचतान की स्थिति बनी हुई है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि संजय नेगी की ज्वाइनिंग को लेकर बनी परिस्थितियों से नाराज होकर ही हरीश रावत ने 15 दिन का राजनीतिक अवकाश लेने का फैसला किया था. हालांकि, ये सब महज अटकलें हैं. रावत के अवकाश को लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा गया, लेकिन पार्टी के भीतर इसे लेकर लगातार बयानबाजी देखने को मिल रही है.
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