गाड़ी चोरी होने के बाद पुलिस और बीमा कंपनी को सूचना देने में कुछ दिनों की देरी के आधार पर बीमा क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता। दिल्ली के पूर्वी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कार चोरी से जुड़े एक मामले में पीड़ित कार मालिक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। आयोग के इस फैसले से उन वाहन मालिकों को राहत मिल सकती है, जिनके बीमा क्लेम केवल सूचना देने में देरी के आधार पर खारिज कर दिए जाते हैं।
बीमा कंपनी को 4.31 लाख रुपये ब्याज सहित देने का आदेश
उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से क्लेम खारिज करने के तरीके को सेवा में गंभीर लापरवाही माना। आयोग के अध्यक्ष सुखवीर सिंह मल्होत्रा और सदस्य रवि कुमार की पीठ ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया कि वह पीड़ित कार मालिक को वाहन के बीमित घोषित मूल्य (IDV) का 75 प्रतिशत यानी 4.31 लाख रुपये अदा करे। इस राशि पर 9 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा, आयोग ने मानसिक उत्पीड़न के लिए 25 हजार रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 12,500 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।
30 दिन में आदेश नहीं माना तो 12% ब्याज
आयोग ने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि बीमा कंपनी 30 दिनों के भीतर आदेश का पालन नहीं करती है, तो उसे 12 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज देना होगा। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी नियमों और प्रक्रियाओं का हवाला देकर किसी पीड़ित को उसके जायज अधिकार से वंचित नहीं कर सकती।
पीड़ित की शिकायत पर चार दिन बाद दर्ज हुआ केस
यह मामला दिल्ली के शकरपुर निवासी वीरेंद्र सिंह की शिकायत से जुड़ा है। उनकी मारुति एस-क्रॉस कार 26 दिसंबर 2019 को गाजियाबाद के प्रताप विहार स्थित सेक्टर-12 से चोरी हो गई थी। वीरेंद्र सिंह ने उसी दिन विजय नगर थाने में शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने 29 दिसंबर को मुकदमा दर्ज किया। वीरेंद्र सिंह ने अपनी कार का बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था और इसके लिए प्रीमियम भी चुकाया था। बीमा पॉलिसी 27 फरवरी 2019 से 26 फरवरी 2020 तक वैध थी। कार का घोषित बीमा मूल्य करीब 5.75 लाख रुपये था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्होंने 2 जनवरी 2020 को बीमा कंपनी को कार चोरी होने की सूचना दी थी। हालांकि, कंपनी ने सूचना देने में देरी का हवाला देते हुए उनका बीमा क्लेम खारिज कर दिया। इसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा, जहां आयोग ने कार मालिक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को मुआवजा देने का निर्देश दिया।
बीमा कंपनी की दलीलों को आयोग ने किया खारिज
सुनवाई के दौरान नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने दलील दी कि कार चोरी होने की सूचना पुलिस को देरी से दी गई और बीमा कंपनी को भी समय पर इसकी जानकारी नहीं मिली। कंपनी के मुताबिक, यह पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन था, इसलिए बीमा क्लेम खारिज करना उचित था। हालांकि, उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केवल सूचना देने में हुई देरी को आधार बनाकर बीमा क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर आयोग ने कार मालिक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को बीमा राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया।
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