Dharm Desk – नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा की आराधना के साथ नकारात्मक शक्तियों से बचाव को लेकर भी कई मान्यताएं हैं। ऐसी ही एक मान्यता छोटे बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी है। कहा जाता है कि नवरात्रि के दौरान नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से बच्चों को बचाने के लिए उनके गले या कमर में एक छोटी सी पोटली बांध देनी चाहिए। इस पोटली में लहसुन, हींग और गोट रखी जाती है। यह चीज बच्चों के आसपास सुरक्षा कवच का काम करती है। उन्हें बुरी नजर के साथ नकारात्मक प्रभावों से बचाने में मदद मिलती है। यही वहज है कि कई परिवारों में आज भी नवरात्रि के दौरान छोटे बच्चों के लिए यह पारंपरिक उपाय किया जाता है।

नवरात्रि में क्यों बांधी जाती है यह पोटली?
पारंपरिक मान्यताओं में नवरात्रि के दिनों को शक्ति साधना और देवी उपासना के लिए विशेष है। इस दौरान जहां मां दुर्गा की पूजा-अर्चना से नकारात्मक शक्तियों के नाश की कामना की जाती है, वहीं बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए भी अलग-अलग उपाय किए जाते है । कहा जाता है छोटे बच्चे जल्दी नजर दोष के प्रभाव में आ सकते हैं। इसी कारण घर की बुजुर्ग महिलाएं बच्चों की सुरक्षा के लिए लहसुन, हींग और सोंठ की छोटी पोटली बांधने की सलाह देती हैं।
लहसुन, हींग और गोट ही क्यों?
इस पारंपरिक उपाय में तीन चीजों को एक साथ कपड़े में बांधा जाता है। मान्यता के अनुसार, लहसुन और हींग की तेज गंध को नकारात्मक प्रभावों से बचाव से जोड़कर देखा जाता है। वहीं सोंठ को इस पोटली का एक खास हिस्सा माना जाता है। इन तीनों को एक साथ बांधकर बच्चों के गले या कमर में रखने की परंपरा कुछ परिवारों में प्रचलित है। इसे बच्चों को बुरी नजर और अनिष्ट से बचाने की कामना के साथ किया जाता है ।
पारंपरिक उपाय कैसे किया जाता है
इसके लिए एक छोटे कपड़े में लहसुन, हींग और सोंठ रख कर उसकी पोटली बना ली जाती है। फिर इसे बच्चे के गले या कमर की डोर में बांधने की परंपरा है । हालांकि, यह लोकमान्यता पर आधारित उपाय है और इससे नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा की गारंटी नहीं मानी जा सकती । छोटे बच्चों के गले या कमर में पोटली बांधना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।

