Business Desk – Retail Inflation September 2026 : सितंबर में रिटेल महंगाई बढ़कर 5.54% पर पहुंच गई है। अगस्त में यह 4.82% थी। आलू, प्याज, टमाटर जैसी सब्जियों और खाने-पीने की दूसरी चीजों के दाम बढ़ने से महंगाई में इजाफा हुआ है। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भी महंगाई पर पड़ रहा है।

खाने-पीने की चीजों की महंगाई अगस्त के 5.97% से बढ़कर सितंबर में 7.74% हो गई। ग्रामीण इलाकों में महंगाई दर 5.24% से बढ़कर 6.08% और शहरी इलाकों में 4.31% से बढ़कर 4.88% पर पहुंच गई।
महंगाई पर काबू पाने के लिए RBI ने बढ़ाई ब्याज दर
महंगाई पर नियंत्रण के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसी महीने 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। मौजूदा हालात को देखते हुए ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम बताई जा रही है। आगे RBI ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रख सकता है या जरूरत पड़ने पर इनमें और बढ़ोतरी कर सकता है।
गांव और शहर की महंगाई में क्या अंतर है?
सरकार रिटेल महंगाई का आकलन करने के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) का इस्तेमाल करती है। इसमें खाने-पीने की चीजें, कपड़े, मकान का किराया, शिक्षा और इलाज जैसी रोजमर्रा के खर्च से जुड़ी वस्तुएं और सेवाएं शामिल होती हैं।
ग्रामीण और शहरी परिवारों के खर्च का तरीका अलग होता है। गांवों में परिवारों के बजट में खाने-पीने की चीजों का हिस्सा ज्यादा होता है। ऐसे में अनाज, सब्जियों और दूसरी खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने पर ग्रामीण महंगाई पर ज्यादा असर पड़ सकता है।
वहीं, शहरों में मकान का किराया, स्कूल फीस, इलाज और आने-जाने का खर्च भी घरेलू बजट का बड़ा हिस्सा होता है। इसलिए शहरी महंगाई पर खाद्य वस्तुओं के साथ इन खर्चों में होने वाले बदलाव का भी असर पड़ता है।
महंगाई कैसे बढ़ती और घटती है?
महंगाई का संबंध वस्तुओं और सेवाओं की मांग और आपूर्ति से होता है। जब किसी चीज की मांग बढ़ती है, लेकिन उसके मुकाबले आपूर्ति कम रहती है, तो उसकी कीमत बढ़ सकती है। इसके उलट, मांग कम होने और आपूर्ति पर्याप्त रहने पर कीमतों में गिरावट आ सकती है।
मौसम, फसल उत्पादन, परिवहन लागत और कच्चे तेल की कीमतें भी महंगाई को प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए, फसल खराब होने से सब्जियों की आपूर्ति घट सकती है, जिससे उनके दाम बढ़ जाते हैं। इसी तरह कच्चा तेल महंगा होने पर परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ सकती है।
5.54% महंगाई का क्या मतलब है?
सितंबर 2026 की रिटेल महंगाई दर 5.54% होने का मतलब है कि सितंबर 2025 के मुकाबले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में शामिल वस्तुओं और सेवाओं के औसत मूल्य स्तर में 5.54% की बढ़ोतरी हुई है।
इसे आसान उदाहरण से समझें। अगर किसी सामान या सामानों की एक तय टोकरी की कीमत सितंबर 2025 में 100 रुपए थी और उसकी कीमत में 5.54% की बढ़ोतरी हुई, तो सितंबर 2026 में उसकी कीमत 105.54 रुपए हो जाएगी।
हालांकि, यह महंगाई की औसत दर है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर सामान की कीमत 5.54% बढ़ी है। कुछ चीजें इससे ज्यादा महंगी हुई हो सकती हैं, जबकि कुछ के दाम घटे भी हो सकते हैं।

