Rewari Diwali Violence : रेवाड़ी। दीपावली के त्योहार पर बाजारों में सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन रेवाड़ी में त्योहार के दौरान हालात कुछ और ही नजर आए। शहर के बाजारों में मारपीट की घटनाओं ने अफरा-तफरी मचा दी। कहीं लाठी-डंडे चलते रहे तो कहीं लोगों के सिर फूट गए। इन घटनाओं में आधा दर्जन से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हैरानी की बात यह रही कि घटनाओं के दौरान पुलिस की प्रभावी मौजूदगी नजर नहीं आई।
बाजारों में मारपीट, लाठी-डंडों से किया हमला
दीपावली के मौके पर रेवाड़ी के बाजारों में खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। इसी बीच अलग-अलग जगहों पर मारपीट की घटनाएं सामने आईं। विवाद इतना बढ़ा कि लोग एक-दूसरे पर लाठी-डंडों से हमला करने लगे।
इन घटनाओं में कई लोगों को चोटें आईं। कुछ के सिर में गंभीर चोट लगने की भी जानकारी है। अचानक हुए बवाल से बाजारों में मौजूद दुकानदारों और ग्राहकों के बीच डर का माहौल बन गया।
महिला पुलिसकर्मी और पिंक राइडर भी नहीं दिखीं
त्योहार से पहले रेवाड़ी पुलिस ने लोगों को सुरक्षित माहौल में खरीदारी कराने का भरोसा दिया था। बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने और पुलिस की गश्त बढ़ाने की बात कही गई थी।
लेकिन त्योहार के दौरान हालात देखकर पुलिस के इंतजामों पर सवाल उठने लगे। लोगों के मुताबिक, बाजारों में न तो महिला पुलिसकर्मियों की पर्याप्त मौजूदगी दिखाई दी और न ही पिंक राइडर नजर आईं। सादी वर्दी और वर्दी में पुलिसकर्मियों की सक्रियता भी दिखाई नहीं दी।
खुलेआम पटाखों की बिक्री पर भी सवाल
बाजारों में अव्यवस्था के बीच खुले में पटाखों की बिक्री का मामला भी चर्चा में रहा। शहर के अलग-अलग हिस्सों में दुकानदारों ने पटाखों की स्टॉल लगाई हुई थीं।
हैरानी यह रही कि कुछ जगहों पर पुलिसकर्मी इन स्टॉल के आसपास दिखाई दिए, लेकिन खुले में पटाखों की बिक्री रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई होती नजर नहीं आई। इससे पुलिस की निगरानी और कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो गए।
सुरक्षा के दावों पर उठे सवाल, जवाब का इंतजार
दीपावली से पहले पुलिस ने लोगों से बिना किसी डर के बाजारों में खरीदारी करने की अपील की थी। भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा भी दिया गया था।
लेकिन त्योहार के दौरान मारपीट, घायलों की संख्या और पटाखों की खुले में बिक्री ने इन दावों की हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए। अब लोगों के मन में सवाल है कि जब बाजारों में इतनी भीड़ थी तो पुलिस की गश्त और निगरानी व्यवस्था कहां थी?
फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस की ओर से कार्रवाई या आधिकारिक स्पष्टीकरण की जानकारी सामने नहीं आई है।
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