RIICO e-Lease System Rajasthan: राजस्थान में औद्योगिक भूखंड लेने वाले उद्यमियों और निवेशकों के लिए लीज एग्रीमेंट की प्रक्रिया आसान बनाने की तैयारी है। राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (रीको) मौजूदा ऑफलाइन व्यवस्था की जगह ई-लीज प्रणाली लागू करने की पहल कर रहा है।

इसके लिए रीको डिस्पोजल ऑफ लैंड रूल्स, 1979 में संशोधन प्रस्तावित है। नई व्यवस्था के तहत लीज एग्रीमेंट तैयार करने, सत्यापन और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर जैसे कई चरण ऑनलाइन पूरे किए जा सकेंगे। हालांकि, दस्तावेज के अंतिम पंजीयन के लिए आवंटी और गवाहों को संबंधित उप-पंजीयक कार्यालय में उपस्थित होना पड़ेगा।

रीको के लीज एग्रीमेंट की प्रक्रिया में क्या बदलेगा?

वर्तमान व्यवस्था में औद्योगिक भूखंड आवंटित होने के बाद लीज एग्रीमेंट के निष्पादन और पंजीयन के लिए आवंटी को रीको के इकाई कार्यालय और संबंधित उप-पंजीयक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। दस्तावेजों की जांच, हस्ताक्षर और अन्य औपचारिकताओं में समय लगता है।

प्रस्तावित ई-लीज प्रणाली में रीको के ईआरपी पोर्टल के माध्यम से लीज एग्रीमेंट तैयार करने और उसे पंजीयन के लिए भेजने की प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जाएगा। इससे भौतिक दस्तावेजों की आवाजाही कम करने और अलग-अलग कार्यालयों में बार-बार जाने की जरूरत घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इस व्यवस्था से दूसरे जिलों और राज्यों में रहने वाले आवंटियों के साथ कंपनियों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को भी राहत मिल सकती है।

आधार सत्यापन से इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर तक पूरी होगी ऑनलाइन प्रक्रिया

प्रस्तावित व्यवस्था में सबसे पहले आवंटी के बकाया भुगतान की स्थिति की जांच की जाएगी। इसके बाद अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं का विवरण दर्ज होगा। आधार आधारित प्रमाणीकरण, गवाहों की जानकारी और जरूरी सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

संबंधित रीको इकाई कार्यालय की जांच के बाद लीज एग्रीमेंट तैयार होगा। इसके बाद आवंटी, गवाह और रीको के अधिकृत अधिकारी निर्धारित क्रम में इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर करेंगे।

दस्तावेज पर जरूरी डिजिटल प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे पंजीयन के लिए संबंधित उप-पंजीयक कार्यालय भेजा जाएगा। इसके लिए एक संदर्भ संख्या भी जारी की जाएगी। इसकी मदद से आवंटी प्रक्रिया की स्थिति जान सकेगा और अपनी सुविधा के अनुसार कार्यालय में समय ले सकेगा।

पंजीयन के लिए उप-पंजीयक कार्यालय जाना जरूरी

ई-लीज प्रणाली लागू होने के बाद भी पंजीयन की सभी औपचारिकताएं ऑनलाइन नहीं होंगी। पंजीयन अधिनियम, 1908 के तहत आवश्यक बायोमेट्रिक पहचान और फोटोग्राफी के लिए आवंटी तथा गवाहों को संबंधित उप-पंजीयक कार्यालय में उपस्थित होना पड़ेगा।

स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क जमा होने की पुष्टि के साथ अन्य जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दस्तावेज का पंजीयन किया जाएगा। इसके बाद पंजीकृत लीज एग्रीमेंट इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से रीको के संबंधित इकाई कार्यालय को भेजा जाएगा।

इस तरह प्रस्तावित व्यवस्था में दस्तावेज तैयार करने और सत्यापन से जुड़े कई चरण डिजिटल होंगे, जबकि पंजीयन के दौरान जरूरी भौतिक उपस्थिति बनी रहेगी।

लीज में बदलाव और हस्तांतरण की प्रक्रिया भी होगी आसान

औद्योगिक भूखंडों से जुड़े कुछ अन्य मामलों को भी डिजिटल व्यवस्था के अनुरूप बनाने की तैयारी है। इनमें लीजहोल्ड अधिकारों का हस्तांतरण, संस्था के गठन में बदलाव, अनुमत गतिविधि में परिवर्तन और मूल लीज एग्रीमेंट में संशोधन जैसी स्थितियां शामिल हैं।

ऐसे मामलों में पूरक या संशोधित लीज एग्रीमेंट तैयार करने की प्रक्रिया को सुगम बनाने का प्रावधान किया जा रहा है।

उद्यमियों को समय और दस्तावेजों की आवाजाही में मिलेगी राहत

रीको की इस पहल का उद्देश्य औद्योगिक भूखंडों से जुड़े कामकाज को सरल बनाना, दस्तावेजों की आवाजाही कम करना और प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है। डिजिटल रिकॉर्ड से अभिलेखों को सुरक्षित रखने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

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