पटना। बिहार की राजनीति में सामाजिक न्याय और हक की लड़ाई को नया आयाम देते हुए राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने एक बार फिर पेंशनभोगियों के मुद्दे पर सरकार को घेरा है। पार्टी के आधिकारिक हैंडल से साझा की गई पोस्ट ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि लाखों बुजुर्गों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की उम्मीदों को भी नई धार दी है।
सम्मानजनक जीवन का अधिकार
आरजेडी की पोस्ट का मुख्य स्वर ‘पेंशन’ को खैरात नहीं, बल्कि कर्मचारियों के जीवन भर की तपस्या का प्रतिफल बताना है। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी ने स्पष्ट किया है कि एक कर्मचारी अपने जीवन के सबसे ऊर्जावान वर्ष व्यवस्था को सुचारू बनाने में झोंक देता है। ऐसे में बुढ़ापे की लाठी यानी पेंशन के साथ किसी भी तरह की कटौती या देरी उनके गरिमामय जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।

प्रमुख बिंदु और मांगें
पार्टी ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए निम्नलिखित बिंदुओं को रेखांकित किया है:
समय पर भुगतान: पेंशन की राशि में हो रहे विलंब को अमानवीय करार दिया गया है।
पुरानी पेंशन योजना (OPS): पार्टी लगातार पुरानी पेंशन बहाली की वकालत कर रही है, जिसे इस पोस्ट में भी प्रमुखता दी गई है।
महंगाई भत्ता: बढ़ती महंगाई के दौर में पेंशनभोगियों के भत्ते को न्यायसंगत बनाने की अपील की गई है।
सियासी गलियारों में हलचल
विशेषज्ञों का मानना है कि आरजेडी का यह कदम केवल एक पोस्ट नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों के लिए एक बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ है। हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों में पुरानी पेंशन योजना ने जिस तरह चुनावी परिणामों को प्रभावित किया है, उसे देखते हुए तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आरजेडी इस बड़े वोट बैंक को साधने की पूरी कोशिश कर रही है।
पेंशन कोई दान नहीं है, यह एक सेवक का हक है जो उसने दशकों तक पसीना बहाकर कमाया है। जो सरकार अपने बुजुर्गों का ख्याल नहीं रख सकती, उसे सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
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