अनिल मालवीय, सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां सरकारी दफ्तरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले के सब रजिस्ट्रार कार्यालय में नियमों का खुला मखौल उड़ाते हुए सरकारी गोपनीय कामकाज निजी लड़कों से कराया जा रहा है। इस गंभीर लापरवाही के कारण कार्यालय की शासकीय गोपनीयता और पारदर्शिता पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
प्राइवेट हाथों में गोपनीय और संवेदनशील काम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उप पंजीयक कार्यालय सीहोर में नियमों को ताक पर रखकर दो प्राइवेट लड़कों-धर्मेन्द्र दांगी और गणेश मीणा- को बैठाया गया है, जिनसे बाकायदा ‘मेकर-चेकर’ का संवेदनशील कार्य कराया जा रहा है। ये प्राइवेट लड़के सब रजिस्ट्रार के निजी कंप्यूटर पर रजिस्ट्री के गोपनीय दस्तावेजों को खोलकर उनका अवलोकन करते हैं। इसके अलावा, कार्यालय में जमीन की रजिस्ट्री कराने आने वाले क्रेता-विक्रेताओं के महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच करने के साथ ही उनके फोटो और आंखों की आईरिश (Iris Scan) लेने का काम भी यही युवक कर रहे हैं।
नियमों के मुताबिक, रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेजों की जांच और संवेदनशीलता से जुड़े यह तमाम कार्य केवल अधिकृत उप रजिस्ट्रार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, लेकिन सीहोर कार्यालय में यह जिम्मेदारी निजी लोगों को सौंपी गई है। बताया जा रहा है कि यह सब रजिस्ट्रार भारतीय काहोड के माध्यम से हो रहा है।
पारदर्शिता की अनदेखी और जनता की परेशानी
कार्यालय में इस तरह की मनमानी के चलते आम नागरिक और रजिस्ट्री कराने आने वाले लोग खासे परेशान हैं। लोगों का आरोप है कि सरकारी दफ्तर में पारदर्शिता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जा रहा है। नियमों के तहत रजिस्ट्री प्रक्रिया देखने के लिए दो स्क्रीन होनी चाहिए—एक बाहर उपभोक्ताओं के लिए और दूसरी उप पंजीयक के लिए, लेकिन यहां दोनों स्क्रीन अंदर ही लगाई गई हैं, जिससे जनता की नजरों से प्रक्रिया छिपाई जाती है।
जिम्मेदारों के अजीब और गोलमोल जवाब
इस पूरे मामले पर जब सब रजिस्ट्रार भारतीय काहोड से पक्ष जानना चाहा, तो उनका गैर-जिम्मेदाराना बयान सामने आया। उन्होंने कहा कि यह शासकीय कार्यालय है, जहां रोज कई लोग आते हैं, और वे इन लड़कों को नहीं जानतीं, कोई भी आकर कुर्सी पर बैठ गया होगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंजीयक प्रेम नंदन सिंह ने स्पष्ट किया है कि प्राइवेट लड़कों से शासकीय कार्य कराना पूरी तरह नियम विरुद्ध है। उन्होंने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कराने की बात कही है, जिसके बाद से विभागीय अमले में हड़कंप मच गया है।
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