Business Desk :- डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 96.78 तक पहुंच गया है। यह मई में दर्ज 96.95 के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब है। रुपये को सहारा देने और करेंसी बाजार में सट्टेबाजी रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कई नियम सख्त कर दिए हैं।

RBI ने विदेशी मुद्रा के सौदों पर पाबंदियां बढ़ाई हैं। बिना वास्तविक कारोबारी जरूरत के करेंसी में बड़ी पोजीशन लेने की सीमा भी घटाई गई है। इसके अलावा, 12 अक्टूबर से तीन सरकारी तेल कंपनियों की रोजाना की पूरी डॉलर जरूरत RBI खुद पूरी करेगा।

  1. कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल करने के बाद दोबारा बुकिंग नहीं

RBI ने रुपये से जुड़े फॉरेक्स डेरिवेटिव्स के नियम बदल दिए हैं। अब सर्कुलर जारी होने के बाद किसी ऑथराइज्ड डीलर के पास कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल कराने वाला यूजर उसे दोबारा बुक नहीं कर सकेगा।

यह नियम डिलिवरेबल और नॉन-डिलिवरेबल, दोनों तरह के कॉन्ट्रैक्ट पर लागू होगा। हालांकि, पहले से तय नियमों के मुताबिक मैच्योरिटी पर कॉन्ट्रैक्ट को आगे बढ़ाने यानी रोलओवर की छूट जारी रहेगी।

  1. हेजिंग की सीमा 10 करोड़ से घटाकर 50 लाख डॉलर

RBI ने बिना वास्तविक कारोबारी एक्सपोजर के करेंसी में पोजीशन लेने की सीमा घटा दी है। ऑथराइज्ड डीलर्स के लिए यह सीमा 10 करोड़ डॉलर से घटाकर 50 लाख डॉलर कर दी गई है।

स्टॉक एक्सचेंजों पर रुपये से जुड़े करेंसी डेरिवेटिव्स में भी बिना वास्तविक एक्सपोजर पोजीशन लेने की सीमा इतनी ही कर दी गई है। इसका मकसद करेंसी बाजार में बड़े और अनावश्यक सौदों को सीमित करना है।

  1. बड़े सौदों पर 20% कैश रिजर्व जरूरी

RBI ने फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व (FERR) व्यवस्था लागू की है। इसके तहत 20 लाख डॉलर से ज्यादा के कुछ रुपये से जुड़े फॉरेक्स डेरिवेटिव्स सौदों पर ऑथराइज्ड डीलर्स को सौदे की कुल तय रकम के 20% के बराबर कैश रिजर्व रखना होगा।

यह नियम उन सौदों पर लागू होगा, जो चालू खाते से जुड़े कारोबारी जोखिम को कम करने के लिए किए जाते हैं और जिनमें यूजर रुपये देकर विदेशी मुद्रा खरीदता है।
इससे बड़े सौदे करना महंगा हो सकता है और बाजार में जोखिम लेने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।

  1. एक ही जोखिम पर दो बार हेजिंग नहीं

RBI ने दोहरी हेजिंग रोकने के लिए भी नियम सख्त किए हैं। अब बैंक और दूसरे ऑथराइज्ड डीलर्स को ग्राहक से लिखित पुष्टि लेनी होगी कि उसने उसी कारोबारी जोखिम को किसी दूसरे डीलर के पास पहले से हेज नहीं किया है।

इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि एक ही जोखिम को दिखाकर अलग-अलग जगह जरूरत से ज्यादा सौदे न किए जाएं।

  1. तेल कंपनियों को 12 अक्टूबर से RBI देगा डॉलर

भारत को विदेशों से कच्चा तेल खरीदने के लिए बड़ी मात्रा में डॉलर की जरूरत होती है। इस वजह से तेल कंपनियों की डॉलर खरीद का असर रुपये पर भी पड़ सकता है।

इसे देखते हुए RBI ने फैसला किया है कि 12 अक्टूबर से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) की रोजाना की पूरी विदेशी मुद्रा जरूरत वह खुद पूरी करेगा।

इससे इन कंपनियों को डॉलर खरीदने के लिए खुले बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। बाजार में डॉलर की मांग कम करने में इससे मदद मिल सकती है। हालांकि, रुपये पर कितना असर होगा, यह दूसरी वैश्विक परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।

विदेशी मुद्रा भंडार में 12.95 अरब डॉलर की गिरावट

RBI के आंकड़ों के मुताबिक, 2 अक्टूबर को खत्म हुए सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 12.95 अरब डॉलर घटकर 734.60 अरब डॉलर रह गया।

इस दौरान विदेशी मुद्रा संपत्तियां 10.66 अरब डॉलर घटकर 604.74 अरब डॉलर और गोल्ड रिजर्व 2.28 अरब डॉलर घटकर 106.41 अरब डॉलर रह गया।

इससे पहले वाले सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार 18.34 अरब डॉलर घटा था। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4 सितंबर को 785.70 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। अब यह उस स्तर से करीब 51 अरब डॉलर नीचे है।

रुपये की गिरावट से आम लोगों पर क्या असर होगा?

डॉलर महंगा होने से भारत के लिए विदेशों से कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी खरीदना महंगा पड़ सकता है। इससे कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और कुछ सामानों की कीमतों पर दबाव आ सकता है।

विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और दूसरे देशों की यात्रा करने वालों को भी डॉलर खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।

दूसरी ओर, कुछ निर्यातकों को फायदा हो सकता है। उन्हें डॉलर में मिलने वाली रकम के बदले ज्यादा रुपये मिल सकते हैं। हालांकि, यह फायदा उनकी लागत और विदेशों में मांग पर निर्भर करेगा।

RBI के फैसलों का मकसद रुपये पर दबाव कम करना और करेंसी बाजार में अनावश्यक कारोबार को रोकना है। रुपये की आगे की चाल अमेरिकी डॉलर, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजार की स्थिति पर भी निर्भर करेगी।