इस दिव्यांग के हौंसले को सलाम, बचपन में रिक्शे से स्कूल जाने पर लोग हंसते थे, अब शिक्षक बनकर समाज को दिखा रहे नई दिशा…

दिनेश द्विवेदी, कोरिया. अगर हौंसले बुलंद हो तो इंसान क्या नहीं कर सकता. कुछ ऐसा ही जज्बा कोरिया जिले के मनेंद्रगढ़ निवासी पवन दुबे में देखा जा सकता है. जो शारीरिक अपंगता के बावजूद शिक्षक के रूप में समाज को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं. हैरान कर देने वाली बात यह है कि पवन बचपन से ही दिव्यांग थे, लेकिन उनके मन में हमेशा आगे बढ़ने की इच्छा थी. यही वजह है कि आज वह एक सफल शिक्षक के रूप में समाज में ज्ञान का उजियारा फैला रहे हैं.

पवन दुबे बचपन से चलने फिरने में असमर्थ थे. इसके बाद भी वह रोजाना रिक्शे से स्कूल जाते थे और तमाम मुश्किलों के बावजूद अपनी पढ़ाई पूरी की. इसकी बदौलत आज वे मनेंद्रगढ़ विकासखंड के प्राथमिक शाला शंकरगढ़ में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के तौर पर पदस्थ होकर समाज को दिशा देने का काम कर रहे हैं.

किया चुनौतियों का सामना

पवन बताते हैं कि उन्होंने कभी हार नहीं मानी. उन्होंने हर चुनौती का सामना पूरी निर्भीकता से किया. कई लोगों ने उनका उपहास उड़ाने की कोशिश की, लेकिन अपनी सोच और हौंसलों की बदौलत उन्होंने सभी को मुंहतोड़ जवाब दिया. उनका मानना है कि अगर इंसान ठान ले तो शारीरिक विकलांगता कभी आड़े नहीं आई.

लीडरशिप की क्षमता

पवन दुबे शिक्षाकर्मी वर्ग-3 होने के साथ ही शिक्षक संगठन के लीडर भी है. शिक्षाकर्मियों के लिए कार्य करने वाले संगठन शालेय शिक्षाकर्मी संघ के पवन ब्लाक अध्यक्ष के साथ ही प्रांतीय प्रवक्ता भी है. पवन ने कई बार शिक्षाकर्मियों के हक की लड़ाई ब्लाक से लेकर जिले और राजधानी तक लड़ी हैं.

बच्चों के लिए प्रेरणा

पवन जिस स्कूल में पढ़ाते हैं, वहां के छात्रों के लिए पवन रोल मॉडल से कम नहीं. प्राथमिक शाला शंकरगढ़ में पढ़ने वाले बच्चे कहते हैं कि भले ही पवन दुबे भले ही दोनों पैर से विकलांग है लेकिन उनके हौंसले को देखकर हमें प्रेरणा मिलती है.

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