भारतीय तटरक्षक बल को आज नया स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत आईसीजीएस समुद्र प्रताप मिला. यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ओर बढ़ने की दिखा में एक बेहतर कदम है, जिसे गोवा शिपयार्ड द्वारा बनाया गया है. यह पोत समुद्री सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में भारत की क्षमता को बढ़ाएगा. गोवा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) के नए जहाज ICGS समुद्र प्रताप को कमीशन किया. यह भारत का पहला पूरी तरह स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण जहाज (Pollution Control Vessel – PCV) है. समारोह में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, तटरक्षक महानिदेशक परमेश सिवमणि और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. समुद्र प्रताप का अर्थ है समुद्र की गरिमा. यह पोत समुद्र में प्रदूषण से निपटने, समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण को साफ रखने के लिए तैयार किया गया है.

भारतीय तटरक्षक बल को आज एक बड़ी मजबूती मिली, जब स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ICGS समुद्र प्रताप को आधिकारिक रूप से सेवा में शामिल किया गया. इस पोत का कमीशनिंग रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया. समुद्र प्रताप गोवा शिपयार्ड लिमिटेड की तरफ से बनाया गया ये पहला प्रदूषण नियंत्रण पोत है. यह भारत के आत्मनिर्भर भारत अभियान और स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

इस जहाज को पूरी तरह भारत में डिजाइन और बनाया गया है, जिसमें 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है. करीब 114 मीटर लंबे इस जहाज की रफ्तार 22 नॉट से ज्यादा है. एक बार ईंधन भरने पर यह 6 हजार नॉटिकल माइल तक चल सकता है. जहाज में आधुनिक मशीनें, कंप्यूटर सिस्टम और प्रदूषण रोकने के अत्याधुनिक उपकरण लगे हैं. लंबाई 114.5 मीटर, चौड़ाई 16.5 मीटर, वजन करीब 4,200 टन, लगभग 40 किमी/घंटा से ज्यादा, लगभग 11,000 किमी तक बिना रुके चल सकता है. दो 7500 किलोवाट डीजल इंजन, स्वदेशी कंट्रोलेबल पिच प्रोपेलर (CPP) और गियरबॉक्स.

प्रदूषण नियंत्रण के लिए जहाज में आधुनिक स्किमर, फ्लोटिंग बूम, साइड स्वीपिंग सिस्टम और एक विशेष प्रदूषण जांच प्रयोगशाला मौजूद हैं. इसके साथ ही इसमें आग बुझाने की आधुनिक व्यवस्था और निगरानी के लिए एडवांस तकनीक भी शामिल है. सुरक्षा के लिहाज से जहाज में आधुनिक हथियार भी लगाए गए हैं.

सबसे बड़ी और खास बात यह है कि पहली बार इस जहाज पर दो महिला अधिकारी नियुक्त की गई हैं. वे पुरुष साथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सभी ड्यूटी निभाएंगी. यह तटरक्षक बल में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का प्रतीक है.

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